दहेज प्रथा बेटियों की जिंदगी निगल रही, समाज को एकजुट होकर उठानी होगी आवाज : अधिवक्ता अस्मिता एक्का
रांची दहेज प्रताड़ना के कारण द्विशा की हुई दुखद मौत को लेकर “दहेज मुक्त झारखंड” संगठन ने गहरा दुख जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच एवं दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिंधु मिश्रा ने कहा कि दहेज जैसी कुप्रथा आज भी समाज में अनेक बेटियों और महिलाओं के जीवन को असमय समाप्त करने का कारण बन रही है।
उन्होंने कहा कि द्विशा की दहेज प्रताड़ना के कारण हुई मृत्यु ने समाज और प्रशासन दोनों को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी है कि दहेज लोभ किस हद तक मानवता को शर्मसार कर सकता है।
सिंधु मिश्रा ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर से कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने समाज से भी दहेज जैसी अमानवीय प्रथा के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने और बेटियों को सम्मान व सुरक्षित जीवन देने का संकल्प लेने की अपील की।
झारखंड प्रदेश अल्पसंख्यक उपाध्यक्ष बबलू खान ने कहा कि दहेज के नाम पर बेटियों को प्रताड़ित करना बेहद शर्मनाक और अमानवीय कृत्य है। समाज को ऐसी मानसिकता के खिलाफ खुलकर सामने आना होगा। उन्होंने कहा कि दोषियों को कड़ी सजा मिले ताकि समाज में सख्त संदेश जाए।
वहीं लातेहार जिला अध्यक्ष अधिवक्ता अस्मिता एक्का ने कहा कि दहेज प्रथा सामाजिक अभिशाप बन चुकी है। इसे समाप्त करने के लिए जागरूकता और कठोर कानून दोनों जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा और सम्मान समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।