पाकुड़ संवाददाता।
महेशपुर। लोक आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व चैती छठ पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हो गया। चार दिनों तक चले इस पर्व के अंतिम दिन व्रतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर 36 घंटे का कठोर निर्जला उपवास पूर्ण किया। घाटों पर इस दौरान आस्था और आध्यात्मिक उत्साह का अद्भुत नजारा देखने को मिला।
सुबह तड़के से ही नदी-तालाबों के घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पारंपरिक वेशभूषा में सजी व्रती महिलाएं सिर पर सूप में प्रसाद—फल, ठेकुआ, नारियल और गन्ना—सजाकर घाट पहुंचीं। जैसे ही सूर्य की पहली किरण फूटी, व्रतियों ने जल में खड़े होकर अर्घ्य अर्पित किया और परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी आयु तथा समाज कल्याण की प्रार्थना की।
घाटों पर छठ गीतों की मधुर गूंज, “छठी मईया” के जयकारे और ढोल-नगाड़ों की धुन से पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। हर तरफ भक्ति, अनुशासन और पवित्रता का वातावरण रहा, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
पर्व को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के व्यापक इंतजाम किए गए। स्थानीय स्वयंसेवकों ने भी पूरी सक्रियता से श्रद्धालुओं की सहायता की, जिससे सभी कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हुए।
चैती छठ केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य और जल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक भी है। स्वच्छता, अनुशासन और सादगी की यह परंपरा समाज को सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश देती है।
पर्व के समापन पर लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएँ दीं। पूरे क्षेत्र में आस्था, विश्वास और सामाजिक एकता का अनुपम उदाहरण देखने को मिला, जिसने इस महापर्व की भव्यता को और बढ़ा दिया।