पाकुड़ से रिपोर्ट,
झारखंड के पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड की रहने वाली कोनिका कोड़ाइन ने आधुनिक खेती को अपनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और नई तकनीकों के सहारे अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी।
कोनिका कोड़ाइन ने खेती की शुरुआत महज 25 डिसमिल जमीन से तरबूज की फसल के साथ की। उन्होंने सूक्ष्म टपक सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) तकनीक का उपयोग किया, जिससे कम पानी में बेहतर उत्पादन संभव हुआ। इस तकनीक के जरिए उन्हें पहली ही फसल से लगभग 47 हजार रुपये की आमदनी हुई।
पहली सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने खेती का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया। आज कोनिका एक एकड़ जमीन में खीरा और तरबूज की खेती कर रही हैं और अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। टपक सिंचाई पद्धति ने न सिर्फ पानी की बचत की, बल्कि उनकी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन भी बढ़ाया।
कोनिका की मेहनत और लगन आज आसपास के किसानों, विशेषकर महिला किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि सही तकनीक, मेहनत और लगन के साथ कम जमीन में भी अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की पहलें किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भर खेती की दिशा में एक नई उम्मीद जगा रही हैं।