गोमिया/रांची। गोमिया विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और बिहार-झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री माधवलाल सिंह का बुधवार सुबह 9:40 बजे रांची के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे लगभग 84 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर मिलते ही गोमिया, बोकारो समेत पूरे झारखंड में शोक की लहर फैल गई।
माधवलाल सिंह झारखंड की राजनीति में सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के प्रतीक माने जाते थे। उन्हें क्षेत्र में “लालो के लाल” के नाम से भी जाना जाता था। वे ऐसे नेता थे, जिन्होंने सत्ता में रहते हुए भी जमीन से जुड़ाव नहीं छोड़ा और आम लोगों के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाए रखी।
राजनीतिक सफर:
माधवलाल सिंह ने वर्ष 1985 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में गोमिया से पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा। 1990 में उन्होंने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। 1995 में हार का सामना करने के बाद वर्ष 2000 में फिर से विधायक बने और बिहार सरकार में मंत्री पद संभाला।
झारखंड राज्य गठन के बाद वे राज्य सरकार में परिवहन एवं उड्डयन मंत्री भी रहे। वर्ष 2005 में पराजय के बाद उन्होंने 2009 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर चौथी बार विधायक बनने का गौरव हासिल किया।
सादगी और सेवा का जीवन:
राजनीति से इतर भी माधवलाल सिंह समाज सेवा में लगातार सक्रिय रहे। वे अपनी पेंशन की राशि से गरीब और जरूरतमंद लोगों को राशन, दवाइयां और कपड़े उपलब्ध कराते थे। धर्मपरायण प्रवृत्ति के कारण उन्हें झारखंड धार्मिक न्यास बोर्ड का अध्यक्ष भी बनाया गया था।
वे अपने बेबाक अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। “कफन में पॉकेट नहीं होता” जैसी बातों के माध्यम से वे नेताओं और समाज को ईमानदारी और सेवा का संदेश देते रहे।
शोक की लहर:
उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है। समर्थकों और स्थानीय लोगों ने उन्हें सच्चा जनसेवक बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
उनकी सादगी, स्पष्टवादिता और जनहित के प्रति समर्पण को लंबे समय तक याद किया जाएगा।