घाघरा (गुमला):
घाघरा प्रखंड के देवाकी पंचायत में कुसुम टोली से देवाकी, देवाकी से काना टोली और लेटेंगा टोली से चामा तक बनी सड़क अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की बड़ी मिसाल बन गई है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह सड़क महज एक साल के भीतर ही पूरी तरह जर्जर हो गई।
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण में भारी अनियमितता बरती गई और ठेकेदार द्वारा घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। विभागीय अभियंताओं और अधिकारियों की अनदेखी के कारण सड़क की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। आज हालत यह है कि सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है और बारिश के दिनों में यह मार्ग दलदल बन जाता है, जिससे आवागमन बेहद मुश्किल हो गया है।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि सड़क की मरम्मत के नाम पर पिछले चार वर्षों से लगातार राशि निकाली जाती रही, जबकि जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। इसको लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद न तो मरम्मत हुई और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी या ठेकेदार पर कार्रवाई की गई।
ग्रामीणों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि बिना कार्य किए राशि निकासी करने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही सड़क की गुणवत्तापूर्ण मरम्मत या पुनर्निर्माण जल्द कराया जाए।
इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। विभाग और उपायुक्त को पत्र लिखकर जांच कराई जाएगी। यदि बिना मरम्मत के राशि निकासी की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी और सड़क की मरम्मत कराने का प्रयास किया जाएगा।
यह मामला एक बार फिर विकास योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।