रथ का घोड़ा, घोड़ा छाप और माधव बाबू की अमिट स्मृतियां
एक आत्मीय संबंध की अविस्मरणीय कहानी पत्रकार दीपक सवाल की कलम से कुछ लोग केवल सार्वजनिक जीवन के बड़े नाम नहीं होते, वे अपने व्यवहार, अपनापन और रिश्तों की ऊष्मा से लोगों के जीवन का हिस्सा बन जाते हैं। स्वर्गीय माधवलाल सिंह, जिन्हें पूरा इलाका स्नेह और सम्मान से ‘माधव बाबू’ कहता था, ऐसे ही…
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