महिलाओं ने बर्ड सेंचुरी घोषित करने की उठाई मांग, एयरपोर्ट व फोरलेन का किया विरोध
बरहरवा।
शिमरतल्ला झील (वेटलैंड) संरक्षण को लेकर चल रहा सत्याग्रह रविवार को अपने 30वें दिन में प्रवेश कर गया। इस अवसर पर दया निधि ओझा शिव मंदिर प्रांगण में डिहारी, हाजीपुर भिठा, पटवर टोला एवं भोलीया टोला गांव की महिलाओं ने सांकेतिक धरना देकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। मातृशक्तियों ने झील संरक्षण की मांग को लेकर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया।
धरनास्थल पर उपस्थित महिलाओं ने कहा कि वेटलैंड्स केवल जलस्रोत ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, जैव विविधता और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार हैं। उन्होंने बताया कि वेटलैंड से सरकार को आर्थिक, पर्यावरणीय, सामाजिक और वैश्विक स्तर पर अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। इसके बावजूद शिमरतल्ला झील के अस्तित्व को खतरे में डालने वाले प्रस्ताव चिंताजनक हैं।
महिलाओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गौचर भूमि पर प्रस्तावित एयरपोर्ट तथा झील के समीप बनने वाली फोरलेन सड़क स्थानीय पारिस्थितिकी को गंभीर नुकसान पहुंचाएगी। उन्होंने शिमरतल्ला झील को बर्ड सेंचुरी घोषित करने की मांग करते हुए कहा कि गांव उजाड़ने वाली सड़क और हरे-भरे खेत-बगीचों को समाप्त करने वाला हवाई अड्डा किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
धरना कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं, जिनमें प्रमुख रूप से रूपा भारती, उर्मिला देवी, ऊषा देवी, जिच्छा देवी, शविता देवी, सुमित्रा देवी, चंचला ओझा, पीहू, कुणाल, कलवतिया देवी, बबली देवी, रीना देवी, सोनी देवी, सुनिता देवी, भागवती देवी, शियावती देवी, ज्योति देवी, मंजू ओझा, आशा देवी, लक्ष्मी देवी, शंजू देवी, जानकी देवी, श्यामा देवी, गीता देवी, ललिता देवी, संगीता देवी, मोनित देवी, मुन्नी देवी, ललिता ओझा, पुतुल देवी, गिरिजा देवी, रूबी देवी, रजिया देवी, महेश्वरी देवी, शुषमा देवी, सुनिता ओझा, उर्मिला ओझा, रिंकू रविदास, गिरीजा देवी, अरिला देवी सहित अन्य माताएं शामिल रहीं।
महिलाओं ने चेतावनी दी कि जब तक शिमरतल्ला झील को संरक्षित करने की ठोस पहल नहीं होती, तब तक उनका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।