लातेहार।झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी बिरसा हरित ग्राम योजना (BHGY) का उद्देश्य मनरेगा के तहत बंजर एवं परती भूमि को फलदार वृक्षारोपण के माध्यम से उपयोगी बनाना और ग्रामीणों, विशेषकर अनुसूचित जाति/जनजाति एवं भूमिहीन परिवारों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत राज्य सरकार करीब 2 लाख एकड़ भूमि को बागवानी क्षेत्र में बदलने के लक्ष्य पर कार्य कर रही है।
लेकिन लातेहार जिले में इस योजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
किनामार में शेड निर्माण में धांधली का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि लातेहार मुख्यालय के किनामार में कृषि विभाग की ओर से चल रहे मुर्गी शेड और बकरी शेड के निर्माण कार्य में बंगला ईट का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह ईंट आमतौर पर बेहद कमजोर मानी जाती है, जिससे निर्माण की मजबूती और टिकाऊपन पर बड़ा सवाल खड़ा होता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि—
“कमज़ोर ईंट से बने ये शेड कुछ ही महीनों में ढह सकते हैं। सरकार टिकाऊ आजीविका देना चाहती है, मगर विभाग के लोग योजना को मज़ाक बना रहे हैं।”
कृषि विभाग का दावा—‘काम प्रगति पर है’
जब इस मामले पर कृषि विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया, तो अधिकारियों ने कहा—
“काम अभी चालू है। अभी गुणवत्ता संबंधी अंतिम रिपोर्ट नहीं दी जा सकती।”
हालाँकि, निर्माण स्थल पर उपयोग हो रही सामग्री गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर रही है, जिससे विभाग की कार्यशैली पर संदेह गहरा रहा है।
3.61 करोड़ की राशि, सात गाँवों में निर्माण—लेकिन गुणवत्ता पर सवाल
जानकारी के अनुसार—
- इस योजना के तहत लगभग 3.61 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई है।
- सात गाँवों में मुर्गी और बकरी शेड के निर्माण का लक्ष्य है।
लेकिन यदि शुरुआत से ही घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग किया जाता रहा तो—
- सरकारी धन की बर्बादी तय है,
- ग्रामीणों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा,
- और योजना अपने मूल उद्देश्य से भटक जाएगी।
‘पकाव-खाओ’ संस्कृति का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि योजना का उद्देश्य गरीबों को मजबूत आजीविका देना था,
लेकिन विभाग के कुछ लोगों ने इसे ‘पकाव-खाओ’ वाली योजना में बदल दिया है, जिसका लाभ सिर्फ अफसरों और ठेकेदारों को मिल रहा है, ग्रामीणों को नहीं।
इस विषय पर झामुमो प्रखंड अध्यक्ष आर्सन तिर्की ने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि योजनाओं का लाभ लंबे समय तक ग्रामीणों को मिल सके। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की जांच कर आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
यह जानकर दुख हुआ कि योजना का कार्यान्वयन इतना खराब हो रहा है। घटिया ईंटों का उपयोग गंभीर समस्या है, इससे योजना का उद्देश्य पूरी तरह से विफल हो जाएगा।