रांची। निकाय चुनावों का असर तत्काल भले ही स्पष्ट न दिखे, लेकिन भविष्य में इसका प्रभाव कांग्रेस पर भारी पड़ सकता है। पार्टी के थिंक टैंक तक यह बात पहुंच चुकी है कि कमजोर प्रदर्शन के आधार पर आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सीटों पर मजबूत दावेदारी करना मुश्किल होगा।
खासकर विधानसभा चुनाव में नुकसान की संभावना प्रबल मानी जा रही है। इसकी भरपाई के लिए पार्टी पंचायत चुनाव में बेहतर प्रदर्शन की रणनीति पर काम कर रही है। प्रदेश कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इस विषय पर लगातार मंथन कर रहा है। विधायकों पर भी बेहतर परिणाम लाने का दबाव बढ़ेगा, ताकि राजनीतिक साझेदारों के साथ समन्वय मजबूत किया जा सके।
फिर से संभलने का मौका?
पार्टी के कई नेताओं का तर्क है कि मौजूदा स्थिति गठबंधन को फिर से संगठित होने का अवसर दे सकती है। संभावना जताई जा रही है कि पंचायत चुनाव में गठबंधन एकजुट होकर मैदान में उतरे।
सूत्रों के अनुसार, Jharkhand Mukti Morcha से निकटता रखने वाले नेताओं को बातचीत की जिम्मेदारी दी जा सकती है, ताकि प्रदेश में कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन बचाए रख सके।
रणनीतिक चूक पर भी चर्चा
पार्टी के भीतर यह चर्चा भी है कि कांग्रेस ने उन भाजपा बागियों को नजरअंदाज कर दिया, जो अपने दम पर चुनाव जीतने में सफल रहे। समय पर उन्हें साथ लिया जाता तो चुनावी आंकड़े कुछ अलग हो सकते थे।
एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से इस विषय में व्यापक संवाद नहीं हुआ। हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन नेताओं और कार्यकर्ताओं को अभी से सक्रिय और तैयार रहने का निर्देश दिया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में कांग्रेस की रणनीति और गठबंधन की दिशा राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाएगी।