
लातेहार। तीन महीने से बंद बेतला नेशनल पार्क के दरवाजे खुलते ही पर्यटन से जुड़े स्थानीय कारोबार में फिर हलचल शुरू हो गई। गुरुवार को पार्क के दोबारा खुलने के साथ ही पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी और जंगल सफारी को लेकर लोगों में उत्साह दिखा। चतरा सांसद कालीचरण सिंह ने वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में फीता काटकर और नारियल फोड़कर पार्क के नए पर्यटन सत्र की शुरुआत की।
पार्क परिसर में पर्यटकों की चहल-पहल के साथ आसपास के दुकानदारों, सफारी वाहन संचालकों और पर्यटन से जुड़े लोगों को भी काम बढ़ने की उम्मीद है। तीन महीने तक पार्क बंद रहने के कारण पर्यटन गतिविधियां सीमित हो जाती हैं। अब पार्क खुलने से स्थानीय बाजार में फिर से ग्राहकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। होटल, छोटे दुकानदार, वाहन चालक और स्थानीय गाइड भी पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से लाभ की आस लगाए हैं।
पहले दिन स्कूली बच्चों समेत कई पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया। लंबे अंतराल के बाद पार्क में पर्यटकों की वापसी से बेतला क्षेत्र में रौनक लौटती नजर आई। सांसद कालीचरण सिंह ने कहा कि बेतला नेशनल पार्क क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान है। इसकी खूबसूरती और वन्यजीव पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। पार्क खुलने से पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए तीन माह बंद रहता है पार्क
बेतला नेशनल पार्क हर साल एक जुलाई से 30 सितंबर तक बंद रहता है। एनटीसीए के निर्देश के तहत इस अवधि में पलामू टाइगर रिजर्व में पर्यटकों के प्रवेश पर रोक रहती है। यह समय वन्यजीवों के प्रजनन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। पर्यटकों और वाहनों की आवाजाही से वन्यजीवों की गतिविधियां प्रभावित न हों, इसलिए इस दौरान पार्क में नो इंट्री रहती है।
बेतला के जंगल में हिरण, हाथी, तेंदुआ, जंगली भैंसा, बंदर और कोटरा समेत कई वन्यजीव पाए जाते हैं। बाघों की मौजूदगी भी पूर्व में सामने आती रही है। पार्क खुलने के साथ अब पर्यटन कारोबार से जुड़े स्थानीय लोगों की नजर आने वाले महीनों में बढ़ने वाली पर्यटकों की संख्या पर है।
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