लातेहार:जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में इन दिनों महुआ चुनने का मौसम चल रहा है। महुआ संग्रह के दौरान कुछ स्थानों पर पेड़ों के नीचे पत्तियों को साफ करने के उद्देश्य से आग लगा दी जाती है, जिससे जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। यह स्थिति पर्यावरण, वन संपदा और वन्य जीवों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।
शनिवार को बालूमाथ प्रखंड अंतर्गत कोमर जंगल में अचानक आग लगने की घटना सामने आई। आग लगते ही स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। यदि समय रहते आग नहीं बुझाई जाती, तो जंगल के बड़े हिस्से में भारी नुकसान होने की आशंका थी।
जिला परिषद उपाध्यक्ष अनीता देवी ने कहा कि जंगल में लगने वाली आग से न केवल पेड़-पौधे नष्ट होते हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी कम हो जाती है। छोटे-छोटे पौधे और औषधीय वनस्पतियां समाप्त हो जाती हैं तथा पक्षियों और वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास भी प्रभावित होता है। आग के कारण जैव विविधता को गंभीर क्षति पहुंचती है और पर्यावरण संतुलन बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि कई बार लापरवाही से फेंकी गई जलती सिगरेट या बीड़ी, अवैध लकड़ी कटाई के प्रयास, शहद निकालने के दौरान धुआं करना तथा जानबूझकर झाड़ियां जलाने जैसी गतिविधियां भी जंगल में आग लगने का कारण बनती हैं।
अनीता देवी ने जिलेवासियों एवं ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि महुआ चुनते समय जंगल में आग बिल्कुल न लगाएं तथा धूम्रपान करने के बाद जलते अवशेष जंगल में न फेंकें। जंगल हमारी प्राकृतिक धरोहर हैं और इनके सुरक्षित रहने से ही पर्यावरण संतुलित रहेगा तथा आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित होगा।
उन्होंने सभी ग्रामीणों, वन सुरक्षा समितियों और युवाओं से आग्रह किया कि कहीं भी जंगल में आग लगने की सूचना तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को दें तथा सामूहिक रूप से जंगल संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।