मंडरो।प्रखंड के मिर्जाचौकी दुर्गा मंदिर प्रांगन में आयोजित सर्वधर्म समन्वय सनातन श्री राम शिव भागवत कथा परिवार द्वारा आयोजित 9 दिवसीय संगीत मय श्री राम शिव भागवत कथा ज्ञान यज्ञ को लेकर रविवार को अयोध्या से आये कथावाचक राम दास जी महाराज द्वारा माता पार्वती व उनके पुत्र भगवान गणेश के प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा की एक समय माता पार्वती जी अपने निवास स्थान पर स्नान ध्यान कर रहीं थीं और भगवान गणेश को दरवाजे पर पहरेदार के रूप में खड़ा कर दी थी.
उसी दौरान भगवान शंकर जंगल से भ्रमण करते हुए आये और दरवाजा के अंदर जाने का प्रयास करने लगे तब भगवान गणेश के द्वारा उन्हें जाने से रोका गया इस पर भगवान शंकर क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से गणेश भगवान के गर्दन के दो टुकड़े कर दिए। इसके उपरांत वह अंदर गए यह देखकर माता पार्वती क्रोधित हो गई और वह भगवान शंकर से पूछने लगी आप अंदर कैसे आए वहां तो पहरेदार के रूप में गणेश भगवान को नियुक्त किया गया था।
माता पार्वती जब घर से बाहर निकली तो देखा कि गणेश भगवान मृत पड़े हैं।तब माता पार्वती काफी क्रोधित हो गई और उन्होंने भगवान शंकर को आदेश दिया कि आप जंगल की ओर जाए और रास्ते में जो प्रथम जीव मिले उनका गर्दन काट के लाये, तब भगवान शंकर के द्वारा जंगल जाने के उपरांत सर्वप्रथम हाथी को घूमते हुए देखा तब उन्होंने अपने त्रिशूल से हाथी के गर्दन को काटकर माता पार्वती के पास लाया गया तब उन्होंने मंत्रो उच्चारण के द्वारा भगवान गणेश को जीवित कर हाथी के सर को उनके धड से जोड़ दिया गया।
उसी समय से भगवान गणेश का सर हाथी नुमा हो गया।मौके पर दुर्गा पुजा समिति के अध्यक्ष राजीव जायसवाल, सचिव वीरेंद्र साह, निर्मल बाबा, पंडित शैलेंद्र गोस्वामी,श्री नाथ चौधरी, प्रमोद गुप्ता,रूद्रेश्वर गुप्ता,बालेशवर भगत, शंभू नाथ जयसवाल सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित थे।