नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पारित वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को लेकर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को बयान जारी कर कहा कि पार्टी बहुत जल्द इस विधेयक की संवैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार लगातार संविधान पर हमले कर रही है, जिसे कांग्रेस कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।
कांग्रेस का बड़ा ऐलान, सुप्रीम कोर्ट में दी जाएगी चुनौती
जयराम रमेश ने कहा, “वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर सीधा हमला है। इस विधेयक को जल्दबाजी में पारित किया गया है, और इसमें कई असंवैधानिक प्रावधान शामिल हैं। कांग्रेस बहुत जल्द इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है। हमें पूरा भरोसा है कि न्यायपालिका संविधान की रक्षा करेगी और सरकार की मनमानी को रोकेगी।”
उन्होंने आगे कहा कि “मोदी सरकार का यह कदम पूरी तरह से असंवैधानिक है। यह सरकार लगातार भारतीय संविधान पर हमले कर रही है, और कांग्रेस इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी। हम इस विधेयक को अदालत में चुनौती देंगे और इसे रद्द कराने की पूरी कोशिश करेंगे।”
विधेयक को लेकर विपक्ष में आक्रोश
विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार ने यह बिल बगैर व्यापक चर्चा के पारित कराया है, जिससे अल्पसंख्यकों की संपत्तियों और अधिकारों पर संकट आ सकता है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस पर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है।
इस मुद्दे पर कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी मोदी सरकार की आलोचना की है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, “यह विधेयक अल्पसंख्यकों के खिलाफ सरकार की मंशा को उजागर करता है। यह भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को कमजोर करने की कोशिश है।”
क्या है वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024?
वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और नियंत्रण से जुड़े कई अहम बदलाव किए गए हैं। इस कानून को लेकर सरकार का कहना है कि वक्फ बोर्डों की जवाबदेही बढ़ाने और पारदर्शिता लाने के लिए इसमें संशोधन किए गए हैं।
हालांकि, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि इस विधेयक के जरिए सरकार वक्फ संपत्तियों के अधिकारों को कमजोर कर रही है और धार्मिक अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों में दखल दे रही है।
कांग्रेस की कानूनी तैयारी
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस शीर्ष वकीलों की एक टीम के साथ सुप्रीम कोर्ट में इस विधेयक को चुनौती देने के लिए याचिका तैयार कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन किया गया है और इसी आधार पर इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी।
सरकार का पक्ष
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि यह विधेयक पूरी तरह से संवैधानिक है और इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता को सुनिश्चित करना है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस के विरोध को “राजनीतिक ड्रामा” बताया और कहा कि “कांग्रेस सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति कर रही है।”
आगे क्या होगा?
अब देखना यह होगा कि कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका कब दाखिल करती है और अदालत इस पर क्या रुख अपनाती है। इस विधेयक को लेकर राजनीति और तेज होने के आसार हैं, क्योंकि यह मामला अल्पसंख्यक समुदाय और उनकी संपत्तियों से सीधे जुड़ा हुआ है।
कांग्रेस ने यह साफ कर दिया है कि वह मोदी सरकार के हर उस फैसले का विरोध करेगी, जो उसे संविधान विरोधी लगता है। वहीं, भाजपा का कहना है कि यह विधेयक न्यायसंगत और आवश्यक सुधारों का हिस्सा है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या निर्णय लेता है और क्या कांग्रेस इस विधेयक को रद्द कराने में सफल हो पाती है या नहीं।