अमीन अंसारी,
चान्हो। रमजान माह का पहला रोजा बड़ों के साथ साथ मासूम बच्चों ने भी रखा। बहुत बच्चों के ये जिंदगी का भी यह पहला रोजा है। तपती धूप की परवाह किए बिना नन्हे मुन्ने बच्चों ने रोजा रखा। अल्लाह और उसके रसूल की रजा हासिल करने के लिए भूख और प्यास की शिद्दत बर्दाश्त की।
लुंडरी के रहने वाले मास्टर अमीन अंसारी के छह साल का बेटा आहिल रैयान ने अपनी जिंदगी का पहला रोजा रखा। रैयान पिछले कई दिन से रमजानुल मुबारक के महीने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था।
रोजा रखने के साथ साथ रैयान ने मस्जिद जाकर अपने वालिद के साथ नमाज भी अदा करता है साथ ही साथ तराबीह भी पढ़ता है। वहीं आठ साल की भतीजी शना अंबर की दूसरी साल की रोजा होगी । खुदा की खुशनूदी हासिल करने के लिए भीषण गर्मी में भूख और प्यास को बर्दाश्त किया।
इन बच्चों के पहला रोजा रखने पर घर में खुशी का माहौल रहा। बच्चों के पहले रोजे पर घर में खास पकवान तैयार किए गए। आहिल रैयान हिना प्रवीण आशिया प्रवीण जोया प्रवीण और अलीफा प्रवीन ने खुदा और उसके रसूल की खुशी के लिए अपनी जिंदगी का पहला रोजा रखा।
इनके अलावा और भी गांव,शहर में ऐसे अनेक बच्चे हैं, जिन्होंने जिंदगी का पहला रोजा रखा और दिनभर इबादत भी की। ये बच्चे नमाज पढ़ने के साथ ही कुरआन की तिलावत करते रहे। शाम को रोजा के इफ्तार के दौरान अपने मनपसंद के लजीज खाने का मजा भी लिया और इनके अम्मी अब्बू ने भी बच्चों की पसंद का पूरा ख्याल रखा।