इंटरनेशनल मार्केट में चावल की कीमतें 15 साल के हाई पर पहुंच गई हैं। वहीं दूसरी ओर लोकल लेवल पर आम लोगों पर आटा और दाल पर देखने को मिली है। वैसे सरकार को उम्मीद है कि बारिश होने के बाद इस कमी को पूरा किया जा सकता है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो देश में आटा और दाल की कीमतों में इजाफा होगा, जिससे देश में महंगाई के घाव और ज्यादा गहरे होते चले जाएंगे।सूत्रों के अनुसार देश में गेहूं और दाल की बुवाई में बड़ी कमी आई है। इस साल अब तक गेहूं की बुवाई 141 लाख हेक्टेयर में हुई है जबकि पिछले साल समान अवधि में गेहूं की बुवाई 149 लाख हेक्टेयर हो चुकी थी।इस साल दालों की बुवाई में 8 फीसदी की कमी देखने को मिल रही है। अब देश में 940 लाख हेक्टेयर में दालों की बुवाई हो चुकी है जबकि पिछले पहले देश में महंगाई बढ़ने की संभावना है।अभी तक दोनों फसलों के लिए पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। सरकार को उम्मीद है कि बारिश होते ही कमी की पूर्ति हो जाएगी लेकिन जानकारों की मानें तो इसकी उम्मीदें कम ही है। अगर बुवाई नहीं बढ़ी तो देश में आटा और दाल का भाव बढ़ सकता है।