गोमिया।सीसीएल प्रबंधन की कथित अनदेखी के कारण झारखंड सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है। इस संबंध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव एवं झारखंड आंदोलनकारी इफ्तिखार महमूद ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि सीसीएल के चारही, रजरप्पा, कथारा, करगली एवं ढोरी क्षेत्र से प्रतिदिन एक करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान राज्य सरकार को हो रहा है।
मुख्य सचिव, झारखंड सरकार को भेजे गए पत्र को प्रेस के लिए जारी करते हुए श्री महमूद ने कहा कि कोयले के अवैध कारोबार के कारण सीसीएल एवं बीसीसीएल की आधिकारिक कोयला बिक्री में भारी गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि बीसीसीएल के प्रबंध निदेशक मनोज कुमार अग्रवाल ने भी बिक्री घटने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार की है।
उन्होंने जानकारी दी कि सीसीएल के उपर्युक्त पांच क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 8000 टन कोयले का अवैध कारोबार होने की सूचना है। राज्य सरकार को कोयला कंपनियों से झारखंड सेस, रॉयल्टी, बाजार शुल्क, फॉरेस्ट ट्रांजिट फीस, डीएमएफ सहित कुल नौ प्रकार के राजस्व एवं शुल्क प्राप्त होते हैं।
श्री महमूद ने बताया कि एक टन पथरीला कोयला (आरओएम) की वर्तमान कीमत लगभग 3600 रुपये है, जिसमें से राज्य सरकार को करीब 1412 रुपये प्राप्त होते हैं। अवैध कारोबारी एक लोरी में 40 से 50 टन कोयला परिवहन कर रहे हैं। इस प्रकार प्रतिदिन 8000 टन कोयले के अवैध कारोबार से राज्य सरकार को विभिन्न मदों में लगभग 1 करोड़ 12 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है।
उन्होंने इस गंभीर राजस्व नुकसान के बावजूद राज्य सरकार की कथित उदासीनता पर खेद प्रकट किया है और इस पर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।