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राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2026 पर उत्कृष्ट कार्य हेतु उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी पाकुड़ होंगे सम्मानित

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राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2026 पर उत्कृष्ट कार्य हेतु उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी पाकुड़ होंगे सम्मानित

पाकुड़:-सोमवार को राष्ट्रीय मतदाता दिवस 2026 के अवसर पर उत्कृष्ट निर्वाचन प्रबंधन एवं मतदाता जागरूकता के लिए जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त श्री मनीष कुमार को दिनांक 25 जनवरी 2026 को आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में माननीय राज्यपाल, झारखण्ड के कर-कमलों से सम्मानित किया जाएगा।

इस अवसर पर उपायुक्त श्री मनीष कुमार ने कहा कि वर्ष 2025 में भी पाकुड़ जिले को राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर सम्मान प्राप्त हुआ था और वर्ष 2026 में पुनः यह उपलब्धि जिले के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय बीएलओ, बीएलओ सुपरवाइजर, ईआरओ, एईआरओ सहित जिला निर्वाचन कार्यालय के सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों की सतत मेहनत, प्रतिबद्धता और टीमवर्क को दिया।

प्रोजेक्ट समावेश पहल से मतदाता आधार में उल्लेखनीय वृद्धि

जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि पाकुड़ जिले में संचालित प्रोजेक्ट समावेश मतदाता जागरूकता अभियानों के परिणामस्वरूप चुनावी समावेशन, मतदाता सूची की सटीकता एवं नागरिक सहभागिता में मापने योग्य और प्रभावशाली सुधार दर्ज किया गया है। यह उपलब्धि योग्य नागरिकों की प्रभावी पहचान, लक्षित जागरूकता अभियानों और सुगम नामांकन व्यवस्था का प्रतिफल है।

युवाओं, दिव्यांगों और वंचित वर्गों की सहभागिता में ऐतिहासिक सुधार

18–19 वर्ष आयु वर्ग के पहली बार मतदान करने वाले युवाओं की संख्या 40,107 से बढ़कर 50,280 हो गई।विद्यालय एवं समुदाय आधारित अभियानों ने युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने में निर्णायक भूमिका निभाई। छूटे हुए दिव्यांग मतदाता, वरिष्ठ मतदाता, तीसरे लिंग के मतदाताओं का मतदाता सूची में समावेशन किया गया है।

प्री-एसआईआर में राज्य स्तर पर पाकुड़ अव्वल

शासन-आधारित सुदृढ़ निगरानी तंत्र के कारण प्री- एसआईआर गतिविधियों में पाकुड़ जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। दिनांक 29 दिसंबर 2025 तक लिट्टीपाड़ा विधानसभा क्षेत्र ने कुल मतदाताओं की 83.87% मैपिंग (वंशानुगत मैपिंग सहित) पूर्ण कर राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया।समग्र रूप से पाकुड़ जिला राज्य स्तर पर प्रथम रहा।

लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करता पाकुड़ मॉडल

इन उपलब्धियों ने न केवल सांख्यिकीय सुधार दर्ज किया, बल्कि लोकतांत्रिक चेतना को भी सुदृढ़ किया। नागरिकों की चुनावी प्रक्रियाओं की समझ बढ़ी, जमीनी स्तर पर सहयोग सशक्त हुआ और प्रशासन- जनता के बीच विश्वास और पारदर्शिता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है

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