नई दिल्ली (पीआईबी): भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में विशिष्ट नागरिकों और रक्षा गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में भारत रणभूमि दर्शन अभियान को झंडी दिखाकर रवाना किया और इसके समापन पर ध्वजारोहण किया। इस अभियान का नेतृत्व भारतीय सेना की तोपखाना रेजिमेंट ने किया।
सेना प्रमुख ने अभियान की राष्ट्रीय महत्वता और रणनीतिक पहुंच की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास देश की सैन्य विरासत को संरक्षित करते हैं और नई पीढ़ी को राष्ट्र सेवा के सर्वोच्च आदर्शों के लिए प्रेरित करते हैं। अभियान ने ऐतिहासिक युद्धक्षेत्रों और सीमावर्ती क्षेत्रों की ओर राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया, जो भारत की सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण आधार हैं।
3,400 किमी की यात्रा द्वारका से दिल्ली तक
3 फरवरी 2026 को द्वारका से शुरू हुई 3,400 किलोमीटर लंबी एसयूवी यात्रा गुजरात और राजस्थान के प्रमुख युद्धक्षेत्रों से गुजरते हुए नई दिल्ली में समाप्त हुई। यात्रा मार्ग में भुज, कच्छ का रण, मुनाबाओ, गडरा, लोंगेवाला, जैसलमेर, बीकानेर, अंबाला सहित कई महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्र शामिल रहे। यह यात्रा सीमावर्ती सड़कों और पगडंडियों से होकर गुजरी, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी और परिचालन तत्परता को प्रदर्शित किया गया।
35 सदस्यीय दल ने दी वीरों को श्रद्धांजलि
35 सदस्यीय दल में तोपखाना रेजिमेंट के जवानों के साथ भारतीय नौसेना और सीमा सुरक्षा बल के कर्मी शामिल थे। यात्रा के दौरान दल ने पश्चिमी मोर्चे पर स्थित युद्ध स्मारकों और ऐतिहासिक स्थलों पर श्रद्धांजलि अर्पित कर देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को नमन किया।
यह अभियान वीर नारियों, पूर्व सैनिकों, एनसीसी कैडेटों, छात्रों और सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों से जुड़ने का सशक्त माध्यम भी बना। स्थानीय समुदायों और प्रशासन द्वारा मिले सम्मान ने सुरक्षा बलों और नागरिकों के बीच मजबूत संबंधों को उजागर किया।
पहले भारत रणभूमि दर्शन अभियान का सफल समापन सशस्त्र बलों की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें अतीत के बलिदानों को सम्मान देते हुए वर्तमान से जुड़कर भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित किया जा रहा है।