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चुनाव में जदयू ने खेला सबसे बड़ा दांव, दोनों सीटों पर उतारे सीएम को हराने वाले उम्मीदवार

चुनाव में जदयू ने खेला सबसे बड़ा दांव, दोनों सीटों पर उतारे सीएम को हराने वाले उम्मीदवार

सभी पार्टियों ने अपने अपने हिसाब से एक से बढ़कर एक योद्धाओं को मैदान में उतारा है,लेकिन जदयू के प्रत्याशियों की बात ही अलग है.
जदयू ने एनडीए गठबंधन में सीट शेयरिंग के मुताबिक दो विधानसभा सीटों पर दो ऐसे दिग्गज प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है, जिनके नाम सीटिंग मुख्यमंत्री को चुनाव में हराने का रिकॉर्ड है.

दोनों ही प्रत्याशी जदयू का चुनावी मास्टर स्ट्रोक माने जा रहे हैं.जदयू ने जहां राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले सरयू राय को झारखंड के जमशेदपुर पश्चिम सीट से वहीं गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर को तमाड़ विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है.जदयू के प्रत्याशियों के हिस्से मुख्यमंत्री को चुनाव हराने का श्रेय है.

तमाड़ विधानसभा सीट से जदयू के प्रत्याशी गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर उस वक्त चर्चा में आए थे, जब उन्होंने साल 2009 में हुए उपचुनाव के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन, जो झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रीमो हैं. उनके खिलाफ बतौर निर्दलीय मैदान में उतरकर उन्हें चुनाव हरा दिया था. इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी, रातों-रात गोपाल कृष्ण पातर उर्फ राजा पीटर पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए थे.

साल 2010 में उन्हें मद्य निषेध मंत्री भी बनाया गया था. राजा पीटर पर तमाड़ के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा की हत्या की साजिश रचने का भी आरोप लगा था. गोपाल कृष्ण पातर को नक्सली कुंदन पाहन के बयान के आधार पर लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा था. गोपाल कृष्ण को झारखंड हाई कोर्ट से दिसंबर 2023 में सशर्त जमानत मिली है. उन्होंने लगभग 6 साल जेल काटी है और उसके बाद जमानत पर बाहर आए.

झारखंड की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले सरयू राय ने साल 2019 के विधानसभा चुनाव में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास को उनके ही गढ़ यानी जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा सीट से 15 हजार से ज्यादा वोटों से पराजित किया था. रघुवर दास साल 1995 से लगातार जमशेदपुर पूर्वी के विधायक के रूप में चुनाव जीतते आ रहे थे. साल 2014 में उन्हें झारखंड का मुख्यमंत्री बनाया गया था. हालांकि साल 2019 में सरयू राय जो उनके ही कैबिनेट में मंत्री रहे थे. उन्होंने रघुवर दास को हरा दिया था.सरयू राय ने ही 1994 में सबसे पहले पशुपालन घोटाला का भंडाफोड़ किया था.

सरयू राय ने जुलाई 1998 से 2004 तक बिहार विधान परिषद के सदस्य के रूप में, जबकि साल 2005 से 2009 तक झारखंड विधानसभा के सदस्य के रूप में जमशेदपुर पूर्वी का प्रतिनिधित्व किया. हालांकि साल 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. 2014 और 2019 में उन्हें जीत मिली और वह विधानसभा पहुंचे. अब एक बार फिर से सरयू राय जमशेदपुर पश्चिम से जदयू के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे हैं.

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