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रेलवे पुल पर लोहे के स्लीपर गाड़कर रास्ता बंद करने के विरोध में किसानों का प्रदर्शन, रेलवे प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी

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रिपोर्ट : केशव तिवारी,

कोटालपोखर (साहिबगंज)। बड़हरवा-पाकुड़ रेलखंड के कोटालपोखर रेलवे स्टेशन के समीप विजयपुर गांव स्थित रेलवे पुल संख्या 256 पर रेलवे द्वारा लोहे के स्लीपर गाड़कर रास्ता बंद किए जाने के विरोध में सोमवार को दर्जनों किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया। पुल के समीप जुटे किसानों ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए आवागमन बहाल करने की मांग की।

प्रदर्शन में मयूरकोला, दुखियाटोला, भाटापारा, पथरिया, बड़ा सुनकर, विजयपुर और मुसहरी टोला सहित आसपास के गांवों के दर्जनों किसान शामिल हुए। किसानों का कहना है कि रेलवे पुल पर लोहे के स्लीपर लगाए जाने से बैलगाड़ी और छोटे वाहनों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। इससे सात गांवों के किसानों और ग्रामीणों के सामने गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।

धान कटनी के समय खड़ी हुई गंभीर समस्या

धान कटनी का समय नजदीक आते ही किसानों की चिंता बढ़ गई है। पहले किसान इसी रेलवे पुल से होकर अपनी फसल खेतों से खलिहान तक पहुंचाते थे। लेकिन पुल पर लोहे के स्लीपर गाड़ दिए जाने के बाद बैलगाड़ी और छोटे वाहनों का निकलना मुश्किल हो गया है। अब किसानों को अपनी उपज खलिहान तक पहुंचाने के लिए करीब 20 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है।

रेलवे पुल पर लोहे के स्लीपर गाड़कर रास्ता बंद करने के विरोध में किसानों का प्रदर्शन, रेलवे प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी

किसानों के अनुसार, कोटालपोखर से गुमानी तक के क्षेत्र में आवागमन के लिए दूसरा कोई सुविधाजनक रेलवे पुल उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पुल संख्या 256 पर रास्ता बंद होने से आसपास के कई गांवों के किसानों की परेशानी बढ़ गई है। खेती की बढ़ती लागत के बीच अतिरिक्त दूरी तय करने से किसानों को समय, श्रम और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किसानों ने सुनाई अपनी परेशानी

स्थानीय किसान बलदेव साहा ने कहा कि रेलवे के इस कदम से गांव के किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। धान कटनी का समय सामने है। खेतों से धान काटकर खलिहान तक पहुंचाना जरूरी है, लेकिन पुल से बैलगाड़ी और छोटे वाहन नहीं निकल पा रहे हैं। रेलवे प्रशासन को किसानों की परेशानी समझते हुए जल्द समाधान करना चाहिए।

वहीं किसान मो. रिजवान ने कहा कि किसान पहले से ही खेती की बढ़ती लागत और मौसम की मार से परेशान हैं। ऐसे में रेलवे पुल पर रास्ता बंद होने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अनाज की ढुलाई के लिए 20 किलोमीटर का चक्कर लगाना किसानों के लिए बेहद कठिन है। यदि समय रहते रास्ते की व्यवस्था नहीं की गई तो किसान रेलवे प्रशासन के खिलाफ आंदोलन तेज करेंगे।

प्रदर्शन में शामिल एक अन्य किसान ने कहा कि रेलवे को सुरक्षा के नाम पर रास्ता बंद करने से पहले ग्रामीणों के आवागमन और किसानों की जरूरतों का ध्यान रखना चाहिए था। धान कटनी के मौसम में रास्ता बाधित होने से पूरे क्षेत्र के किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। रेलवे प्रशासन को जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।

रेलवे प्रशासन से वैकल्पिक रास्ते की मांग

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने रेलवे प्रशासन से मांग की कि रेलवे पुल संख्या 256 पर किसानों और ग्रामीणों के सुरक्षित आवागमन के लिए उचित व्यवस्था की जाए अथवा तत्काल वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराया जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि धान कटनी से पहले समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे एकजुट होकर व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन किसानों की इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेता है और मयूरकोला, दुखियाटोला, भाटापारा, पथरिया, बड़ा सुनकर, विजयपुर एवं मुसहरी टोला के ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।

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