अमड़ापाड़ा में विकास को लेकर ग्रामीणों ने डीसी को सौंपा 7 सूत्री मांग-पत्र
कोयला कंपनियों के CSR मद से सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा,पेयजल व स्वच्छता योजनाएं संचालित कराने की मांग

पाकुड़ संवाददाता। अमड़ापाड़ा प्रखंड के ग्रामीणों ने क्षेत्र में व्याप्त विभिन्न विकास संबंधी समस्याओं को लेकर शुक्रवार को उपायुक्त मेघा भारद्वाज को सात सूत्री मांग-पत्र सौंपा। ग्रामीणों ने क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति में सुधार के लिए कोयला कंपनियों के CSR मद से स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास योजनाएं संचालित कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि अमड़ापाड़ा प्रखंड में दो बड़ी कोयला कंपनियां कार्यरत हैं। इन कंपनियों की गतिविधियों से सरकार को DMFT, राजस्व सहित विभिन्न मदों में पर्याप्त आय प्राप्त होती है। इसके बावजूद खनन प्रभावित क्षेत्र के कई गांव आज भी सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, बिजली, स्वच्छता और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों के विकास में उपलब्ध संसाधनों का स्थानीय जरूरत के अनुसार इस्तेमाल होना चाहिए।

जर्जर सड़कों के स्थायी निर्माण की मांग
ग्रामीणों ने विशेष रूप से अमड़ापाड़ा मुख्य बाजार की जर्जर सड़क का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हैं। बारिश के दौरान जलजमाव होने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इससे स्कूली बच्चों, पैदल राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है।
मांग-पत्र में पहाड़पुर एडीबी लिंक रोड से अमड़ापाड़ा बाजार होते हुए दुमका सीमा तक जर्जर सड़क का स्थायी निर्माण कराने की मांग की गई है। इसके अलावा प्राकृतिक विहार मोड़ से राधा गोविंद मंदिर होते हुए वासमती तक सड़क तथा अमड़ापाड़ा बाजार से पोखरिया रोड होते हुए राजा गैराज तक सड़क की मरम्मत कराने की मांग रखी गई है।
स्ट्रीट लाइट, नाली और CCTV की भी मांग
ग्रामीणों ने पहाड़पुर से दुर्गा मंदिर एवं मुख्य बाजार में नई स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग की है। जहां आवश्यकता है, वहां नाली निर्माण कराने तथा बाजार में बढ़ती चोरी एवं दिनदहाड़े डकैती की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रमुख स्थानों पर CCTV कैमरे लगाने की मांग भी की गई है। इसके अलावा मुख्य सड़क के दोनों ओर पेवर ब्लॉक से फुटपाथ निर्माण कराने की मांग रखी गई है।
हाट परिसर और स्वास्थ्य सुविधा का मुद्दा
ग्रामीणों ने हाट परिसर के जर्जर टीनशेड को बदलने तथा परिसर की साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण कराने की मांग भी की। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों ने कहा कि अमड़ापाड़ा का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से बंद पड़ा है। जब तक सीएचसी को पूर्ण क्षमता के साथ शुरू नहीं किया जाता, तब तक कोयला कंपनियों के CSR मद से डॉक्टरों की टीम और मेडिकल वैन की व्यवस्था की जाए, ताकि ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने उपायुक्त से संबंधित विभागों और कोयला कंपनियों के साथ समन्वय कर समस्याओं के समाधान की दिशा में शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की। ग्रामीणों की ओर से जहांगीर आलम ने उपायुक्त मेघा भारद्वाज को सात सूत्री मांग-पत्र सौंपा। ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो जनता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण आंदोलन करने को बाध्य होगी।
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