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साहिबगंज फोरलेन के 2 किमी टनल की तैयारी शुरू, चार जगह होगी मिट्टी की जांच

साहिबगंज फोरलेन के 2 किमी टनल की मिट्टी जांच शुरू, दिसंबर तक डीपीआर का लक्ष्य

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साहिबगंज। साहिबगंज में फोरलेन परियोजना के महत्वपूर्ण हिस्से करीब दो किलोमीटर लंबे प्रस्तावित टनल के निर्माण की दिशा में जमीनी स्तर पर प्रक्रिया शुरू हो गयी है। टनल निर्माण से पहले मंगलवार को मंडरो प्रखंड के करम्बी मौजा और बेतौना में मिट्टी की जांच के लिए टीम पहुंची। डीपीआर तैयार करने वाली रोडिक कोष्टा कंपनी की देखरेख में लखनऊ की अरुण स्वाइल लैब प्राइवेट लिमिटेड की टीम ने ड्रिलिंग का काम शुरू किया।

प्रस्तावित टनल क्षेत्र में चार स्थानों पर ड्रिलिंग कर जमीन के अंदर की मिट्टी के नमूने लिये जाएंगे। मशीन के माध्यम से करीब 200 फीट तक गहराई में ड्रिलिंग कर अलग-अलग स्तरों से सैंपल लिये जाएंगे। इन नमूनों की तकनीकी और रासायनिक जांच के जरिए जमीन के नीचे की परत, मिट्टी की प्रकृति और उसकी मजबूती का अध्ययन किया जाएगा।

साहिबगंज फोरलेन के 2 किमी टनल की तैयारी शुरू, चार जगह होगी मिट्टी की जांच

चार जगह होगी ड्रिलिंग

मिट्टी की जांच के लिए टीम ने टीआरडी-80 मशीन स्थापित की है। निर्धारित स्थानों पर ड्रिलिंग के बाद प्राप्त सैंपल को लैब भेजकर जांच की जाएगी। मिट्टी जांच का काम कंपनी के सुपरवाइजर रत्नेश सिंह के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम कर रही है। जांच की पूरी प्रक्रिया एनएचएआई के पदाधिकारियों की निगरानी में होने की बात कही गयी है।

जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट रोडिक कोष्टा कंपनी को सौंपी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर टनल निर्माण से जुड़े तकनीकी पहलुओं को डीपीआर में शामिल किया जाएगा।

भूगर्भीय रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

गंगा पुल के जीरो माइल से पूर्वी दिशा में फोरलेन सड़क को सकरीगली-महाराजपुर की ओर जोड़ने के लिए पहाड़ी क्षेत्र में करीब दो किलोमीटर लंबे टनल का प्रस्ताव है। इसे फोरलेन परियोजना की अहम कड़ी माना जा रहा है।

मिट्टी जांच में जमीन की स्थिति अनुकूल पाये जाने के बाद डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद टनल और इससे जुड़े सड़क हिस्से के निर्माण के लिए निविदा की प्रक्रिया शुरू होगी। फिलहाल टनल निर्माण की अगली प्रक्रिया भूगर्भीय जांच और डीपीआर पर निर्भर है।

दिसंबर तक डीपीआर, मार्च 2027 में टेंडर का लक्ष्य

साहिबगंज में टनल और संबंधित सड़क का डीपीआर तैयार करने का काम रोडिक कोष्टा को दिया गया है। दिसंबर 2026 तक डीपीआर तैयार होने की उम्मीद है। इसके बाद तीसरे फेज में करीब दो किलोमीटर टनल और लगभग 12 किलोमीटर सड़क के निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया प्रस्तावित है।

मार्च 2027 तक टेंडर जारी करने का लक्ष्य बताया गया है। निर्माण शुरू होने के बाद टनल और संबंधित सड़क के निर्माण में करीब दो वर्ष लगने की संभावना है। निर्धारित समय के अनुसार काम आगे बढ़ने पर वर्ष 2029 तक इस हिस्से के पूरा होने की उम्मीद है।

3500 करोड़ से अधिक की परियोजना

अरवल से फरक्का तक प्रस्तावित फोरलेन एनएच-33 की कुल लंबाई करीब 462.2 किलोमीटर बतायी गयी है। इसमें झारखंड के साहिबगंज जिले में 81.73 किलोमीटर हिस्सा शामिल है। एलाइनमेंट में बदलाव के बाद जिले में फोरलेन की लंबाई पहले प्रस्तावित करीब 93 किलोमीटर से घटकर 81.73 किलोमीटर रह गयी है।

पूरी परियोजना की लागत 3500 करोड़ रुपये से अधिक बतायी जा रही है। तीसरे फेज में टनल के साथ करीब 12 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जाना है। इस सड़क को मल्टी मॉडल टर्मिनल से जोड़ने की भी योजना है।

दो लेन का होगा टनल

प्रस्तावित टनल दो लेन का होगा। इसमें रोशनी समेत आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की योजना है। दोनों लेन को बीच-बीच में आपस में जोड़ने का भी प्रस्ताव है, ताकि आपात स्थिति में एक लेन से दूसरे हिस्से तक पहुंच बनाई जा सके। हालांकि टनल का अंतिम तकनीकी स्वरूप डीपीआर और भूगर्भीय जांच की रिपोर्ट के आधार पर तय होगा।

साहिबगंज-गोविंदपुर रोड से भी जुड़ेगा फोरलेन

फोरलेन सड़क भरतिया पेट्रोल पंप के आसपास साहिबगंज-गोविंदपुर रोड के ऊपर से गुजरेगी। यहां फोरलेन को साहिबगंज-गोविंदपुर रोड से जोड़ने की योजना है। वहीं तालझारी की ओर आगे बढ़ने पर फोरलेन से एक और कनेक्शन बंदरगाह की ओर जाने का प्रस्ताव है।

इससे गंगा पुल, साहिबगंज शहर, सकरीगली, मल्टी मॉडल टर्मिनल और फरक्का की दिशा में सड़क संपर्क और मजबूत होने की उम्मीद है।

गंगा पुल के बाद टनल अहम कड़ी

गंगा पुल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में चल रहा है। पश्चिमी हिस्से में गंगापुर की ओर फोरलेन सड़क का निर्माण भी जारी है। अब गंगा पुल के जीरो माइल से पूर्वी दिशा में फोरलेन को जोड़ना परियोजना की महत्वपूर्ण कड़ी है।

इसी कड़ी में पहाड़ के बीच प्रस्तावित करीब दो किलोमीटर का टनल प्रमुख तकनीकी कार्य है। चार स्थानों पर ड्रिलिंग के साथ मिट्टी की जांच शुरू होने से जमीन के नीचे की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर डीपीआर, निविदा और निर्माण की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

रिपोर्ट : निशांत कुमार सानू

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