
रिपोर्ट: निशांत कुमार सानू,
पाकुड़। अमड़ापाड़ा प्रखंड की दो महिलाओं ने संघर्ष और संकल्प के दम पर अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी है। कभी परिवार का भरण-पोषण करने के लिए हड़िया बेचने को मजबूर रहीं तालामई मुर्मू और सोनोती टुडू आज आत्मनिर्भर बनकर न केवल परिवार की आय बढ़ा रही हैं, बल्कि अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव भी रख रही हैं।

रोज 200-250 की कमाई से 15-18 हजार मासिक आय तक का सफर
जामुगड़िया पंचायत के बड़ापहाड़पुर गांव की तालामई मुर्मू सात बच्चों की मां हैं। पहले हड़िया बेचकर वह रोजाना 200 से 250 रुपये कमाती थीं। वर्ष 2022 में फूलो-झानो आशीर्वाद अभियान से जुड़ने के बाद उन्हें झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के आर्थिक सहयोग और द नज के तकनीकी मार्गदर्शन से 35 हजार रुपये का ब्याजमुक्त ऋण मिला।
इस सहयोग से उन्होंने किराना दुकान शुरू की और साथ ही बकरी पालन अपनाया। आज उनकी दुकान से रोज 500 से 600 रुपये की बिक्री होती है और मासिक आय 15 से 18 हजार रुपये तक पहुंच गई है। आगे वे मुर्गी पालन शुरू करने की तैयारी में हैं।
हड़िया छोड़ा, खेती और पशुपालन से बढ़ाई आमदनी
बासमती पंचायत के कोलकीपाड़ा गांव की सोनोती टुडू भी पहले हड़िया बेचकर परिवार चलाती थीं। पति को नियमित रोजगार नहीं मिलने से आर्थिक स्थिति कमजोर थी। 2022 में अभियान से जुड़ने के बाद उन्हें 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिली।
उन्होंने किराना दुकान शुरू की और हड़िया बेचना पूरी तरह बंद कर दिया। इसके साथ ही सुअर पालन और खेती को अपनाया। तकनीकी सहयोग से उन्होंने 7-8 डिसमिल जमीन में बैंगन, करेला और भिंडी की खेती की। नवजीवन सखी रामी मरांडी के मार्गदर्शन में अब तक 80 किलो से एक क्विंटल तक सब्जियां बेच चुकी हैं। वर्तमान में उनकी मासिक आय 14 से 15 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
आय बढ़ी तो आत्मविश्वास भी बढ़ा
तालामई और सोनोती की कहानी केवल आमदनी बढ़ने की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ने की प्रेरणादायक मिसाल है। आर्थिक सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन ने उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दिया है। अब दोनों महिलाएं अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर रही हैं और बच्चों की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दे रही हैं.
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