सरस्वती शिशु मंदिर कोटालपोखर में मनाया गया रक्षाबंधन,बच्चों ने एक-दूसरे को बांधा रक्षा सूत्र
प्रधानाचार्य ने बताया रक्षाबंधन का महत्व

कोटालपोखर संवाददाता। सरस्वती शिशु मंदिर कोटालपोखर परिवार की ओर से गुरुवार को राखी बनाओ एवं रक्षाबंधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय की बहनों ने भैया की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके सुख, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की। इस दौरान विद्यालय परिसर में उत्साह और भाई-बहन के स्नेह का माहौल देखने को मिला।
प्रधानाचार्य ने बताया रक्षाबंधन का महत्व
मौके पर विद्यालय के प्रधानाचार्य मनोहर साहू ने भैया-बहनों को रक्षाबंधन पर्व के महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल से ही रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा चली आ रही है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण की अंगुली में चोट लगने पर द्रौपदी ने अपने आंचल का कपड़ा फाड़कर उनकी अंगुली पर बांधा था। इसी घटना को रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।
स्नेह और विश्वास का प्रतीक है राखी
प्रधानाचार्य ने कहा कि राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि स्नेह, विश्वास और रिश्तों की मजबूती का प्रतीक है। रक्षाबंधन के दिन बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना करती हैं। वहीं भाइयों का भी दायित्व है कि वे अपनी बहनों की सुरक्षा, सम्मान और देखभाल का संकल्प लें।
भेदभाव भूलकर सहयोग करने का संदेश
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व हमें रिश्तों की अहमियत के साथ प्रेम, सम्मान और एक-दूसरे की देखभाल का संदेश देता है। विद्यालय में सभी भैया-बहन की तरह रहते हैं और आपसी भेदभाव को भूलकर एक-दूसरे का सहयोग करते हैं।
कार्यक्रम में विद्यालय के सचिव भावेश कुमार साह, आचार्य विकास चंद्र साह, अनुप लाल रजक, बिप्लब सिंह, भीम घोष, रोहित साह, आचार्या साक्षी कुमारी समेत विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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