पाकुड़ (संवाददाता):केशव तिवारी,
झारखंड के पाकुड़ जिले के महेशपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक शराबी पति ने अपनी पत्नी और मासूम बेटी की निर्मम हत्या कर दी। यह घटना रद्दीपुर ओपी क्षेत्र के गारामारा गांव में मंगलवार रात घटी, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। इस दोहरे हत्याकांड के बाद गांव में शोक और भय का माहौल है।
घटना का विवरण
मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी नरेश टुडू ने अपनी 42 वर्षीय पत्नी सूरुज किस्कू की कुदाल से हमला कर हत्या कर दी। जब उसकी 12 वर्षीय बेटी नेहा टुडू अपनी मां को बचाने के लिए बीच-बचाव करने आई, तो आरोपी ने उसका गला दबाकर हत्या कर दी। इस निर्मम घटना ने न केवल एक परिवार को खत्म कर दिया, बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है।
घटना के बाद आरोपी ने सबूत मिटाने की कोशिश भी की। उसने अपनी पत्नी के शव को घर से करीब 200 मीटर दूर एक निर्माणाधीन मकान में ले जाकर गड्ढा खोदकर छिपा दिया। वहीं मासूम बच्ची का शव घर के आंगन में ही पड़ा रहा, जो सुबह ग्रामीणों की नजर में आया।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। जांच टीम में पुलिस निरीक्षक मदन कुमार शर्मा, महेशपुर थाना प्रभारी रवि शर्मा, ओपी प्रभारी अजय कुमार उपाध्याय सहित कई अधिकारी शामिल थे। पुलिस ने घटनास्थल की बारीकी से जांच की और ग्रामीणों से पूछताछ की।
शुरुआत में केवल बच्ची का शव ही बरामद हुआ था, जबकि महिला का शव गायब था। पुलिस ने आसपास के इलाके में गहन तलाशी अभियान चलाया, जिसके बाद घर से लगभग 200 मीटर दूर स्थित एक निर्माणाधीन सरकारी आवास में गड्ढे से महिला का शव बरामद किया गया। यह दृश्य बेहद भयावह था और इससे आरोपी की क्रूरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
पुलिस ने आरोपी नरेश टुडू को मौके से ही हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। फिलहाल उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और हिंसा का इतिहास
ग्रामीणों और मृतका के परिजनों के अनुसार, आरोपी नरेश टुडू का व्यवहार पहले से ही हिंसक रहा है। वह अक्सर शराब के नशे में अपनी पत्नी के साथ मारपीट करता था और कई बार उस पर जानलेवा हमला भी कर चुका था। बताया जा रहा है कि मृतका सूरुज किस्कू की यह तीसरी शादी थी, और नरेश टुडू उसका तीसरा पति था।
कुछ दिन पहले ही नरेश टुडू पश्चिम बंगाल के एक ईंट भट्टे में काम करने गया था और दो दिन पहले ही गांव लौटा था। लौटने के बाद भी उसका व्यवहार नहीं बदला और बुधवार रात को किसी बात को लेकर विवाद हुआ, जिसने इस भयानक घटना का रूप ले लिया।
ग्रामीणों का बयान
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सुबह जब उन्होंने बच्ची को आंगन में पड़ा देखा, तो उन्हें शक हुआ। पास जाकर देखने पर बच्ची के नाक से खून बह रहा था और गले पर दबाव के निशान थे। वहीं आरोपी घर के अंदर सोता हुआ मिला, जिससे ग्रामीणों का शक और गहरा गया। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि अगर पहले ही आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई होती, तो शायद यह घटना टल सकती थी। गांव के लोगों में इस बात को लेकर भी आक्रोश है कि घरेलू हिंसा की शिकायतों को समय पर गंभीरता से नहीं लिया गया।
सामाजिक और प्रशासनिक सवाल
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है—क्या घरेलू हिंसा के मामलों में समय पर हस्तक्षेप हो रहा है? क्या ग्रामीण क्षेत्रों में नशे की समस्या पर पर्याप्त नियंत्रण है? क्या महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी तंत्र मौजूद है?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं हैं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़ी हैं। नशे की लत और पारिवारिक तनाव जब नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं, तो उनका परिणाम अक्सर इस तरह की त्रासदियों के रूप में सामने आता है।
पुलिस और प्रशासन की अपील
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे घरेलू हिंसा या किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। साथ ही, प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि क्षेत्र में शराब और नशे के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा।