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पांच दिन से धरने पर बैठे लोगों में बढ़ रही है नाराजगी, कहा ये आर या पार की लड़ाई

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पांच दिन से धरने पर बैठे लोगों में बढ़ रही है नाराजगी, कहा ये आर या पार की लड़ाई

बरहरवा संवाददाता।शेरशाहबादी जाति प्रमाण पत्र पुनः निर्गत करने की मांग को लेकर बरहरवा प्रखंड मुख्यालय परिसर में जारी अनिश्चितकालीन महाधरना शुक्रवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। लगातार पांच दिनों से धरनास्थल पर डटे समुदाय के लोगों में प्रशासन की चुप्पी और उदासीन रवैये को लेकर भारी आक्रोश देखा गया।धरना स्थल पर बड़ी संख्या में…

पांच दिन से धरने पर बैठे लोगों में बढ़ रही है नाराजगी, कहा ये आर या पार की लड़ाई
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पांच दिन से धरने पर बैठे लोगों में बढ़ रही है नाराजगी, कहा ये आर या पार की लड़ाई

बरहरवा संवाददाता।शेरशाहबादी जाति प्रमाण पत्र पुनः निर्गत करने की मांग को लेकर बरहरवा प्रखंड मुख्यालय परिसर में जारी अनिश्चितकालीन महाधरना शुक्रवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। लगातार पांच दिनों से धरनास्थल पर डटे समुदाय के लोगों में प्रशासन की चुप्पी और उदासीन रवैये को लेकर भारी आक्रोश देखा गया।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में समुदाय के छात्र, युवा एवं बुजुर्ग शामिल हुईं। आंदोलनकारियों ने “हक दो या कुर्सी छोड़ो”, “प्रशासन की तानाशाही नहीं चलेगी”, “शेरशाहबादी समाज का अपमान बंद करो”, “हमारा हक हमें दो” जैसे नारों के साथ प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया।
धरना को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि पांच दिनों से शांतिपूर्ण आंदोलन चलने के बावजूद जिला और अंचल प्रशासन पूरी तरह मूकदर्शक बना हुआ है। प्रशासन की यही चुप्पी अब समाज के गुस्से को और भड़का रही है। इस बार समाज निर्णायक लड़ाई के मूड में है। अगर शांतिपूर्ण ढंग से हमारी मांगों को तवज्जो नहीं दी गई तो अपने हक अधिकार को लेने के लिए जो भी हथकंडे अपनाना पड़े, हम पीछे नहीं हटेंगे।
मुखिया मो. इश्तियाक ने प्रशासन के तर्कों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अंचल प्रशासन यह कहकर पल्ला झाड़ रहा है कि खतियान में शेरशाहबादी जाति दर्ज नहीं है, इसलिए प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा। यह तर्क पूरी तरह तथ्यहीन और गैर-जिम्मेदाराना है। बिहार और पश्चिम बंगाल में भी किसी के खतियान में शेरशाहबादी जाति दर्ज नहीं है, क्योंकि यह पहचान अंतिम सर्वे सेटलमेंट के बाद मंडल आयोग और सच्चर कमेटी की अनुशंसा के दौरान परिभाषित हुई। ऐसे में खतियान में इसका उल्लेख होना संभव ही नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार और झारखंड सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा जारी विभिन्न गजट और दिशा-निर्देशों के अनुसार शेरशाहबादी समुदाय को प्रमाण पत्र निर्गत किया जाना चाहिए। बिहार और पश्चिम बंगाल में आज भी स्थानीय जांच के आधार पर प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है, जबकि झारखंड में भी वर्ष 2012 तक यही प्रक्रिया लागू थी। फिर अचानक इसे बंद करना समझ से परे है।
वहीं तोफाइल शेख ने प्रशासन को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर जल्द हमारी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। अब शेरशाहबादी समाज अपने अधिकार के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ने को तैयार है।
धरना स्थल पर अजमाईल शेख, वसीम अकरम, मो. जावेद, जहीर शेख, आफताब आलम, शोएब आलम सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

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