एंकर:
बोकारो थर्मल के पेक थाना क्षेत्र में हाडकॉक कोयला फैक्ट्री के नाम पर अवैध कोयला तस्करी का काला खेल खुलेआम जारी है। एजेंसियों की छापेमारी और जांच के दावों के बावजूद जमीन पर कोई असर नहीं दिख रहा है। बड़ी बात यह कि कागजों में सब कुछ ठीक बताया जाता है, जबकि हकीकत इसका उलटा है।
रिपोर्ट:प्रशान्त सिन्हा गोमिया बोकारो
गोमिया (बोकारो)। पेक थाना क्षेत्र के पिलपिलो में संचालित एक कोयला फैक्ट्री में जिला परिषद अध्यक्ष सुनीता देवी और सदस्य खुशबू कुमारी ने निरीक्षण किया, जहाँ कई गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि फैक्ट्री में कोयले को पोड़ा करने के दौरान बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैल रहा है। आसमान जहरीली धुएँ से भर रहा है, जिससे फैक्ट्री के आसपास रहने वाले ग्रामीण गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। कई लोग प्रदूषणजनित बीमारियों का शिकार बन रहे हैं।
निरीक्षण टीम के अनुसार, फैक्ट्री संचालकों की दादागिरी इस कदर हावी है कि वे नियम-कानून को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं। जब अधिकारियों ने कोयले से संबंधित वैध कागजात और नदी के पानी उपयोग की अनुमति दिखाने को कहा, तो फैक्ट्री संचालक न तो कोई दस्तावेज़ दिखा सके और न ही कोई स्पष्ट जवाब दे पाए।
उल्टा पकड़े जाने पर फैक्ट्री प्रबंधन ने धमकी भरा व्यवहार किया, अभद्रता की और निरीक्षण टीम को डराने-धमकाने की कोशिश की। मामले की शिकायत प्रशासन को भेज दी गई है, और मांग उठी है कि फैक्ट्री के नाम पर चल रहे इस कोयले के काले कारोबार को तुरंत बंद कराया जाए।
सवाल वही है—
आखिर कब रुकेगा यह अवैध कोयला धंधा, और कब प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा?