कौशल प्रतियोगिता में पाकुड़ के विद्यार्थियों ने दिखाई हुनर की ताकत, मॉडलों में झलकी तकनीकी प्रतिभा
डीसी मेघा भारद्वाज ने किया मॉडलों का निरीक्षण, कहा- किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल भी जरूरी; 30 स्कूलों में मिल रहा व्यावसायिक प्रशिक्षण

रिपोर्ट : निशांत कुमार सानू,
पाकुड़ संवाददाता।: हुनर को अवसर और कल्पना को तकनीक का रूप देकर पाकुड़ के विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का दम दिखाया। बाजार समिति परिसर में मंगलवार को आयोजित जिला स्तरीय कौशल प्रतियोगिता 2026-27 में छात्र-छात्राओं के नवाचार, तकनीकी समझ और रचनात्मक सोच ने सबका ध्यान खींचा। किसी ने इलेक्ट्रॉनिक्स तो किसी ने ऑटोमोबाइल, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े मॉडल प्रस्तुत कर यह साबित करने की कोशिश की कि स्कूली शिक्षा के साथ कौशल विकास भी भविष्य की मजबूत नींव बन सकता है।

झारखंड शिक्षा परियोजना के तत्वावधान में आयोजित प्रतियोगिता में जिले के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने अपने-अपने ट्रेड से जुड़े मॉडल प्रदर्शित किए। उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने सभी मॉडलों का बारीकी से निरीक्षण किया और विद्यार्थियों से उनकी कार्यप्रणाली एवं उपयोगिता की जानकारी ली। विद्यार्थियों की रचनात्मकता, मेहनत और नवाचार की सराहना करते हुए उन्होंने उनका उत्साह बढ़ाया। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल करने वाले प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।
दीप प्रज्वलित कर हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का उद्घाटन उपायुक्त मेघा भारद्वाज, जिला शिक्षा पदाधिकारी अनीता पूर्ति, जिला क्रीड़ा पदाधिकारी राहुल कुमार और एडीपीओ पीयूष कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर और पौधा भेंट कर स्वागत किया गया।
सिर्फ डिग्री नहीं, हुनर भी बनाएगा आत्मनिर्भर : डीसी
उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा कि बदलते दौर में रोजगार की दुनिया तेजी से बदल रही है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक दक्षता और तकनीकी कौशल हासिल करना भी जरूरी है। कौशल प्रतियोगिताएं बच्चों को अपनी क्षमता पहचानने, हुनर निखारने और नवाचार को धरातल पर उतारने का अवसर देती हैं। कौशल आधारित शिक्षा रोजगार के साथ स्वरोजगार की संभावनाओं को भी मजबूत करती है।

उन्होंने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा नियमित पढ़ाई का विकल्प नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के ज्ञान को व्यावहारिक रूप देने का माध्यम है। स्कूल स्तर से ही बच्चों को अलग-अलग कौशलों से जोड़ने की जरूरत है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर सीखने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।
68 में से 30 स्कूलों में चल रही कौशल आधारित पढ़ाई
जिला शिक्षा पदाधिकारी अनीता पूर्ति ने बताया कि जिले के 68 उच्च एवं हाई स्कूलों में से 30 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित की जा रही है। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, कृषि, हेल्थकेयर, पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, ब्यूटी एंड वेलनेस तथा आईटी-आईटीईएस जैसे ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल से लैस करना है।
मॉडलों में दिखा हुनर, नवाचार को मिला मंच
प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपने मॉडल के माध्यम से तकनीकी ज्ञान और रचनात्मक सोच का प्रदर्शन किया। उपायुक्त ने प्रस्तुत मॉडलों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें कुछ नया सोचने और करने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे बच्चों को अपनी प्रतिभा सामने लाने और भविष्य के लिए खुद को तैयार करने का अवसर मिलता है।
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