पितृपक्ष 2026 की शुरुआत, 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेगा श्राद्ध पक्ष
Pakud News

बरहरवा (संवाददाता)। सनातन धर्म में पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने वाला महापर्व पितृपक्ष इस वर्ष 26 सितंबर (शनिवार, पूर्णिमा श्राद्ध) से शुरू होकर 10 अक्टूबर (शनिवार, सर्वपितृ अमावस्या) को पितृ विसर्जन के साथ संपन्न होगा। इस दौरान कुल 16 दिनों तक तर्पण और श्राद्ध का विधान रहेगा।
बरहरवा बड़ी काली मंदिर के आचार्य तरुण महाराज ने बताया कि पितृपक्ष को महालय भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस अवधि में किए गए तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
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पितरों के तर्पण की विधि (आचार्य के अनुसार)
आचार्य तरुण महाराज ने बताया कि श्रद्धालु घर पर भी विधिवत तर्पण कर सकते हैं:
1. तैयारी:
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। तांबे या पीतल के पात्र में जल, गंगाजल, काले तिल, जौ, कच्चा दूध और चावल मिलाएं। हाथ में कुश की पवित्री धारण करें।
2. दिशा और समय:
दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें, क्योंकि इसे पितरों की दिशा माना जाता है। कुतुप मुहूर्त (सुबह 11:36 से दोपहर 12:24) को श्रेष्ठ माना गया है।
3. तर्पण विधि:
गोत्र और पितरों का नाम लेकर जल अर्पित करें। पहले देव-ऋषि तर्पण और फिर पितृ तर्पण करें। “ॐ पितृभ्यो नमः” मंत्र का जाप करते हुए तीन बार अंजलि से जल अर्पित करें।
4. पंचबलि:
तर्पण के बाद कौआ, गाय, कुत्ता, चींटी और देव के लिए भोजन निकालें तथा दान करें।
प्रमुख तिथियां
- 26 सितंबर: पूर्णिमा श्राद्ध
- 27 सितंबर: प्रतिपदा श्राद्ध
- 4 अक्टूबर: मातृ नवमी
- 10 अक्टूबर: सर्वपितृ अमावस्या (पितृ विसर्जन)

आचार्य तरुण महाराज ने बताया कि इस वर्ष पितृपक्ष का शनिवार से शुरू होकर शनिवार को समाप्त होना एक विशेष शनि संयोग माना जा रहा है। मान्यता है कि इस दौरान श्रद्धा से तर्पण करने पर पितृ दोष और शनि दोष दोनों से शांति मिलती है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि इस अवधि में सात्विक जीवन अपनाएं, मांस-मदिरा से परहेज करें और जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र का दान करें।
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