उद्घाटन के इंतजार में मयूरकोला आईटीआई कॉलेज, भवन बना असामाजिक तत्वों का अड्डा
ग्रामीणों ने जल्द संचालन शुरू करने की मांग की
रिपोर्ट : निशांत कुमार सानू,
कोटालपोखर संवाददाता। साहिबगंज जिले के बरहरवा प्रखंड के मयूरकोला गांव में बना आईटीआई कॉलेज करीब पांच वर्षों से उद्घाटन और संचालन की बाट जोह रहा है। वर्ष 2015-16 के आसपास कॉलेज की आधारशिला रखी गयी थी और वर्ष 2020-21 में भवन का निर्माण पूरा हो गया। इसके बावजूद अब तक संस्थान शुरू नहीं हो सका है। इससे स्थानीय युवाओं में निराशा है।
कॉलेज के निर्माण से मयूरकोला और आसपास के गांवों के युवाओं में उम्मीद जगी थी कि उन्हें तकनीकी शिक्षा के लिए दूसरे जिले का रुख नहीं करना पड़ेगा। लेकिन संस्थान शुरू नहीं होने के कारण छात्रों को आज भी करीब 25 से 30 किलोमीटर दूर पाकुड़ जाकर तकनीकी शिक्षा हासिल करनी पड़ रही है।
मयूरकोला ग्राम पंचायत के अंतर्गत 11 गांव आते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं जो आईटीआई जैसी तकनीकी शिक्षा हासिल कर रोजगार के अवसर तलाशना चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि संस्थान समय पर चालू हो गया होता तो अब तक क्षेत्र के सैकड़ों युवा तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके होते।
असामाजिक तत्वों का अड्डा बना भवन
लंबे समय से खाली पड़े आईटीआई कॉलेज भवन की स्थिति अब खराब होने लगी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, शाम होते ही भवन परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है। यहां शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। भवन में लगे खिड़कियों के शीशे भी तोड़ दिये गये हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति के कारण आसपास रहने वाले लोगों, विशेषकर महिलाओं में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार भवन का उपयोग शिक्षा के बजाय असामाजिक गतिविधियों के लिए होना चिंता का विषय है।
जल्द शुरू करने की मांग
ग्रामीण शंकर शाह ने कहा कि यदि समय रहते आईटीआई कॉलेज का उद्घाटन कर संचालन शुरू कर दिया जाता तो आसपास के छात्र-छात्राओं को तकनीकी शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। इतने वर्षों से भवन खाली पड़ा है और धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है।
ग्रामीणों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों से बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए आईटीआई कॉलेज का जल्द उद्घाटन कर नियमित कक्षाएं शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि संस्थान के शुरू होने से युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण के साथ रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।
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