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साहिबगंज में शेरशाहबादी जाति की पहचान पर जाँच तेज,महाराजपुर-मोगलपाड़ा में समिति का सर्वे



बरहरवा (साहिबगंज):
झारखंड के साहिबगंज जिले में शेरशाहबादी जाति की पहचान और सामाजिक स्थिति को लेकर गठित जाँच समिति ने गुरुवार को महाराजपुर एवं मोगलपाड़ा क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। यह जाँच उपायुक्त, साहिबगंज के निर्देश पर गठित पाँच सदस्यीय समिति द्वारा की जा रही है, जिसका उद्देश्य शेरशाहबादी समुदाय की वास्तविक सामाजिक स्थिति, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और जातीय पहचान का निष्पक्ष मूल्यांकन करना है।

साहिबगंज में शेरशाहबादी जाति की पहचान पर जाँच तेज,महाराजपुर-मोगलपाड़ा में समिति का सर्वे

निरीक्षण के दौरान समिति ने स्थानीय ग्रामीणों, बुजुर्गों और समुदाय के प्रतिनिधियों से व्यापक संवाद स्थापित किया। इस दौरान शेरशाहबादी एवं खोरठा समुदायों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक भिन्नताओं को समझने का प्रयास किया गया। समिति ने विशेष रूप से इस तथ्य पर ध्यान केंद्रित किया कि दोनों समुदायों के कई पुराने खातियानों में जाति के रूप में “शेख” अंकित है, बावजूद इसके दोनों समुदाय स्वयं को अलग-अलग पहचान वाला बताते हैं।

जाँच दल में अनुमंडल पदाधिकारी, राजमहल, भूमि सुधार उप समाहर्ता (LRDC), अंचल अधिकारी, बरहरवा सहित शेरशाहबादी डेवलपमेंट सोसाइटी के प्रतिनिधि—मो. इस्तियाक, मो. आजमाइल, तौफाइल शेख, मामूद हसन और सोलोमन शेख शामिल रहे। सभी सदस्यों ने क्षेत्र का दौरा कर जमीनी हकीकत को समझने के लिए लोगों से सीधे बातचीत की।

समिति ने अपने निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों से उनके रीति-रिवाज, परंपराएं, भाषा, खान-पान, विवाह प्रथाओं और वंशावली से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां एकत्र कीं। साथ ही, समुदाय के बुजुर्गों और बुद्धिजीवियों से ऐतिहासिक तथ्यों पर चर्चा की गई, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि शेरशाहबादी और खोरठा समुदायों के बीच वास्तविक अंतर क्या है।

उल्लेखनीय है कि शेरशाहबादी समुदाय द्वारा जाति प्रमाण-पत्र निर्गत करने की मांग को लेकर प्रशासन के समक्ष कई आवेदन प्रस्तुत किए गए थे। इन मांगों की सत्यता और सामाजिक आधार की जांच के लिए 01 जून 2026 को उपायुक्त, साहिबगंज द्वारा इस समिति का गठन किया गया था। समिति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह क्षेत्रीय स्तर पर अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे, ताकि प्रशासन आगे की कार्रवाई कर सके।

जाँच के दौरान यह भी सामने आया कि कई परिवारों की पहचान सरकारी दस्तावेजों में “शेख” के रूप में दर्ज है, जिससे जातीय पहचान को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। इस मुद्दे को स्पष्ट करने के लिए समिति ने पुराने रिकॉर्ड, जमीन के दस्तावेज और सामाजिक इतिहास को खंगालने की प्रक्रिया शुरू की है।

स्थानीय लोगों ने समिति के समक्ष अपनी-अपनी दलीलें और ऐतिहासिक साक्ष्य प्रस्तुत किए। कुछ लोगों का कहना है कि शेरशाहबादी समुदाय की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान है, जबकि अन्य का मानना है कि यह खोरठा समुदाय से जुड़ा हुआ है। समिति इन सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार कर रही है।

पूरा निरीक्षण कार्य शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माहौल में सम्पन्न हुआ। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। समिति ने आश्वासन दिया कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों का निष्पक्ष विश्लेषण किया जाएगा।

अंततः समिति द्वारा एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त, साहिबगंज को सौंपी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी, जिसमें जाति प्रमाण-पत्र जारी करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हो सकते हैं।

यह जाँच न केवल शेरशाहबादी समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे क्षेत्र में जातीय पहचान और सामाजिक संरचना को समझने के लिए भी एक अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में समिति की रिपोर्ट से इस मुद्दे पर स्पष्टता आने की उम्मीद है।


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