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साधना सप्ताह से निरंतर सीखने और क्षमता विकास की संस्कृति होगी सुदृढ़ : आयुक्त के सचिव,साधना सप्ताह के तहत सामूहिक परिचर्चा का आयोजन

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साधना सप्ताह से निरंतर सीखने और क्षमता विकास की संस्कृति होगी सुदृढ़ : आयुक्त के सचिव,साधना सप्ताह के तहत सामूहिक परिचर्चा का आयोजन

पलामू:- राष्ट्रीय साधन सप्ताह के तहत प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय भवन में सामूहिक चर्चा का आयोजन किया गया। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार, कर्मयोगी भारत के सहयोग तथा झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक, सुधार तथा राजभाषा विभाग के निर्देश पर आयोजित साधना सप्ताह में कार्यालय के पदाधिकारी एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।

आयुक्त के सचिव-सह-साधन सप्ताह क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष श्री बिजय वर्मा एवं सदस्य सामाजिक सुरक्षा पलामू प्रमंडल के उपनिदेशक श्री पीयूष ने iGOT कर्मयोगी प्लेटफार्म पर उपलब्ध पाठ्यक्रम के संबंध में चर्चा करते हुए अबतक पूर्ण किए गए पाठ्यक्रमों की समीक्षा की।इन पाठ्यक्रमों में मुख्य रूप से शामिल इमर्जिंग टेक्नोलॉजी से परिचय, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मूल बातें सीखना अनुप्रयोग और नैतिकता, गवर्नेंस सस्टेनेबिलिटी थ्रू इंडियन नॉलेज सिस्टम, कार्यस्थल पर साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के साथ नवाचार एक डिजाइन सोच दृष्टिकोण, वित्तीय धोखाधड़ी-डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचाव आदि पर सामूहिक चर्चा की गई।

आयुक्त के सचिव-सह-साधना सप्ताह क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष बिजय वर्मा ने साधना सप्ताह के उद्देश्यों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि विभिन्न सेवा के पदाधिकारी एवं कर्मचारियों में निरंतर सीखने और क्षमता विकास की संस्कृति को सुदृढ़ करना इसका मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने विभिन्न पदाधिकारी एवं कर्मचारियों से साधना सप्ताह के दौरान iGOT कर्मयोगी प्लेटफार्म पर उपलब्ध विषयों पर अबतक सीखेने की जानकारी भी ली।

आयुक्त के सचिव-सह-साधना सप्ताह क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष बिजय वर्मा एवं सदस्य पीयूष ने आधुनिक तकनीक के उपयोग, उसकी चुनौतियों तथा उससे जुड़े सुरक्षा पहलुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की।कार्यक्रम के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के सकारात्मक उपयोग पर विशेष जोर देते हुए बताया गया कि एआई आज कार्यों को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और त्वरित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

साथ ही इसके दुरुपयोग की संभावनाओं से भी अवगत कराते हुए सही और गलत के बीच स्पष्ट अंतर समझने की आवश्यकता पर बल दिया गया।परिचर्चा में कार्यस्थल पर साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न उदाहरण प्रस्तुत किए गए। डिजिटल अरेस्टिंग जैसे नए साइबर अपराधों के तरीकों की जानकारी देते हुए अधिकारियों एवं कर्मियों को सतर्क रहने तथा समय रहते उचित बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई।

साइबर फ्रॉड से बचाव हेतु आधुनिक तकनीकों और सतर्कता के महत्व को रेखांकित किया गया।वक्ताओं ने कहा कि तकनीक का सही ज्ञान न केवल कार्य क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि व्यक्ति को अधिक दक्ष भी बनाता है। सभी को साधना सप्ताह के तहत iGOT कर्मयोगी प्लेटफार्म पर उपलब्ध पाठ्यक्रम के विषय को गंभीरता से सीखने, समझने तथा संबंधित पोर्टल पर उपलब्ध प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी दक्षता को और निखारने की सलाह दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि सीखने और ज्ञान प्राप्त करने की कोई समयसीमा एवं आयु सीमा नहीं होती। निरंतर सीखने की प्रवृत्ति ही व्यक्ति को श्रेष्ठ बनाती है। एआई और अन्य डिजिटल तकनीकों का सही उपयोग हमारे लिए वरदान साबित हो सकता है, जबकि गलत उपयोग इसे अभिशाप में बदल सकता है।अंत में यह संदेश दिया गया कि हर तकनीक के दो पहलू होते हैं—अच्छाई और बुराई। हम सभी का दायित्व है कि हम अच्छाइयों को अपनाते हुए तकनीक का सदुपयोग करें और एक सशक्त, सुरक्षित एवं प्रगतिशील कार्यसंस्कृति का निर्माण करें।

परिचर्चा में प्रशाखा पदाधिकारी राजेश कुमार गुप्ता, सहायक प्रशाखा पदाधिकारी मनीष कुमार, विकास कुमार सिंह, सचिन मीणा, प्रशांत कुमार, साकेत कुमार चौबे एवं रणधीर कुमार, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी बिजय कुमार ठाकुर, एसएमपीओ अमनदीप कुजूर, देवेश वर्मा, कनीय सचिवालय सहायक सोनू कुमार एवं अविनाश राज, राहुल कुमार आदि उपस्थित रहे।

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