दिल्ली में GRAP-4 के तहत BS-6 वाहनों को ही अनुमति मिलने के बाद यह सवाल स्वाभाविक है कि BS-6 इंजन में ऐसा क्या खास है, जो उन्हें प्रदूषण के लिहाज़ से बेहतर बनाता है। आसान भाषा में समझिए
🔍 BS-6 इंजन क्या है?
BS-6 (Bharat Stage-6) भारत का सबसे कड़ा वाहन उत्सर्जन मानक है, जो अप्रैल 2020 से लागू है। यह यूरोप के Euro-6 मानक के बराबर है।
🌿 BS-6 इंजन क्यों ज़्यादा पर्यावरण-अनुकूल हैं?
1️⃣ प्रदूषण में भारी कमी
BS-6 मानक के तहत:
डीज़ल गाड़ियों से निकलने वाला
नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) 👉 लगभग 70% कम
पेट्रोल गाड़ियों से
NOx 👉 लगभग 25% कम
2️⃣ बेहतर फ्यूल (कम सल्फर)
BS-6 वाहनों में 10 ppm सल्फर वाला ईंधन इस्तेमाल होता है
पुराने BS-4 फ्यूल में सल्फर लगभग 50 ppm था ➡️ कम सल्फर = कम धुआं + बेहतर इंजन परफॉर्मेंस
3️⃣ एडवांस एग्जॉस्ट टेक्नोलॉजी
BS-6 गाड़ियों में लगे होते हैं:
DPF (Diesel Particulate Filter) – काले धुएं को रोकता है
SCR (Selective Catalytic Reduction) – NOx को नाइट्रोजन और पानी में बदल देता है
ऑक्सीडेशन कैटेलिस्ट – जहरीली गैसों को कम करता है
4️⃣ रियल-टाइम एमिशन मॉनिटरिंग
BS-6 वाहनों में On-Board Diagnostics (OBD-II) सिस्टम होता है
अगर प्रदूषण ज़्यादा हो रहा हो, तो ड्राइवर को तुरंत अलर्ट मिलता है
5️⃣ ठंड में भी कम प्रदूषण
पुरानी गाड़ियां ठंड में ज़्यादा धुआं छोड़ती हैं, लेकिन BS-6 इंजन लो-टेम्परेचर में भी साफ़ दहन (clean combustion) करते हैं।
🚫 पुरानी गाड़ियों पर बैन क्यों?
पुरानी BS-3 और BS-4 गाड़ियां:
ज़्यादा PM2.5 और NOx छोड़ती हैं
दिल्ली की हवा को ज़हरीला स्मॉग बना देती हैं ➡️ इसलिए GRAP-4 में इन्हें चलाने पर रोक लगाई गई है।
BS-6 इंजन: ✔ कम धुआं ✔ बेहतर टेक्नोलॉजी ✔ सख्त उत्सर्जन नियंत्रण ✔ दिल्ली जैसी शहरों में हवा सुधारने में कारगर
यही वजह है कि GRAP-4 के दौरान सिर्फ़ BS-6 गाड़ियों को चलाने की इजाज़त दी गई है।