दो दिवसीय पलामू किला मेला संपन्न,मेला ने दिलाई पंरपरा की याद।


नीलकमल शुक्ला की रिपोर्ट,
मेदिनीनगर:- राजा मेदिनीराय की याद में लगने वाला औरंगा नदी तट स्थित सतबरवा प्रखंड क्षेत्र के फुलवरिया मे दो दिवसीय पलामू किला मेला मंगलवार को संपन्न हो गया।पलामू किला परिसर स्थित राजा मेदिनीराय की प्रतिमा पर मेला आयोजन समिति संरक्षक सह पंसस अरविद सिंह चेरो, अध्यक्ष विश्वनाथ सिंह चेरो, सचिव विनोद यादव, रबदा मुखिया शंभू उरांव, उमेश सिंह समेत कई लोगो ने माल्यार्पण कर सोमवार को इसका आगाज किया। मंगलवार को मेला में लगे दुकान से पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र, देशी मिठाई के साथ लक्ष्मण झूला, मौत का कुआं के साथ होटलों के साथ पान दुकान और मिनरल वाटर की भी खूब बिक्री रही। राजस्व मेला घोषित नहीं होने व पलामू किला का मरम्मत नहीं होने पर लोगों में नाराजगी दिखी। सूर्यमल सिंह चेरो ने कहा कि पलामू ही नहीं पूरे देश का गौरव पलामू किला और मेला है। अब तक इस मेला को राजस्व मेला घोषित हो जाना चाहिए था। किला का जीर्णोद्धार करने के बाद सरकार को इसे पर्यटन क्षेत्र घोषित कर देना चाहिए था। आज राजा मेदिनीराय के किले को देखने के लिये बड़ी संख्या लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी।औरंगा नदी तट पर सैकड़ों लोगों ने पिकनिक का आनंद लिया। लोगों ने कमलदह झील भी देखा।छठ पूजा के दूसरे दिन आयोजित इस जतरा मेला को देखने के लिए सुबह से ही दर्शकों की भीड़ एकत्रित होने लगी थी। मेले में चेरी दाई की पूजा-अर्चना व झांकी निकाली गई। वहीं आदिवासी समूह के लोग मांदर की थाप पर थिरकते रहे। पलामू किला मेला को देखने के लिए हजारों लोग अपने निजी वाहन, आटो, साइकिल, ट्रैक्टर, जीप व पैदल मेला स्थल पर पधारे थे।

राजा मेदिनीराय द्वारा बनाए गए पुराना व नया पलामू किला कमलदह झील को लोगों ने दीदार किया। किला तक चढ़ने के लिए सीढ़ी नहीं रहने के कारण लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। मेला स्थल तक पहुंचने के लिए सड़क की स्थिति भी अच्छी नहीं है। नदी के किनारे स्थित मेले में पलामू किले के अलावा अन्य जिले के लोग भी आए थे। बताया जाता है कि राजा मेदिनी राय की पत्नी कमलदह झील में ही स्नान करने जाती थी। इस कारण कमलदल झील देखने को ले ज्यादा व्याकुल दिखे। अंधेरी कोठरी व किला में स्थित अनेकों जर्जर भवन का लोगों ने दीदार किया। वहीं मेले में लकठो, बादाम की बिक्री जमकर हुई। विदित हो कि मेले का आयोजन प्रत्येक वर्ष छठ बीतने के दूसरे दिन होता है। यह मेला दो दिनों तक चलता है।
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