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उत्क्रमित मध्य विद्यालय लबदा में द्वितीय शिक्षक-अभिभावक बैठक संपन्न, बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर

उत्क्रमित मध्य विद्यालय लबदा में द्वितीय शिक्षक-अभिभावक बैठक संपन्न, बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर

बरहड़वा। उत्क्रमित मध्य विद्यालय लबदा में बुधवार को द्वितीय शिक्षक-अभिभावक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता प्रभारी प्रधानाध्यापक बबलू कुमार दास ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य बच्चों के शत-प्रतिशत नामांकन, शिक्षा में अभिभावकों की भागीदारी तथा विद्यालय और समुदाय के बीच सहयोग बढ़ाना रहा।

प्रभारी प्रधानाध्यापक बबलू कुमार दास ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में अभिभावकों की सक्रिय भूमिका अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय अकेले बच्चों के विकास की गारंटी नहीं दे सकता, बल्कि इसमें अभिभावकों की निरंतर भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि नियमित उपस्थिति, अनुशासन और घर पर पढ़ाई का माहौल तैयार करने में अभिभावक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने प्रोजेक्ट रेल के तहत विद्यालय के बच्चों के बेहतर प्रदर्शन की जानकारी दी और बताया कि कई छात्र-छात्राओं ने शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय उपलब्धि हासिल की है। साथ ही उन्होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम की उपयोगिता समझाई। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में व्यावसायिक शिक्षा से बच्चों को रोजगारपरक अवसर उपलब्ध होंगे।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) का पुनर्गठन आगामी 12 सितंबर (शुक्रवार) को आयोजित आमसभा के माध्यम से किया जाएगा। इस आमसभा में अधिक से अधिक अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया।

बैठक में शिक्षक तरुण कुमार, विजय कुमार महतो, सच्चिदानंद झा सहित सभी शिक्षकों ने बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यालय को आगे ले जाने के सुझाव दिए। अभिभावकों ने भी विद्यालय के विकास में सहयोग का आश्वासन दिया।

बैठक में बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित थे, जिनमें उपासी देवी, गौरी कुमारी, सुलेखा देवी, रिंकू देवी, जितेंद्र नाथ पोद्दार, निलेश कुमार महतो, प्रमोद कुमार साव, रंभा देवी, अंजू देवी, निशा कुमारी, नूतन देवी, बिंदु देवी, धनलक्ष्मी देवी और रेशमा कुमारी प्रमुख रूप से शामिल रहीं।

इस बैठक से अभिभावकों और विद्यालय के बीच सहयोग की नई दिशा तय हुई, जिससे बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य को मजबूती मिलेगी।

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