पतना। अंचल क्षेत्र के मयुरझुटी मौजा में वनभूमि पर इकोटूरिज्म पार्क एवं चाहरदीवारी निर्माण को लेकर ग्रामीणों और वन विभाग के बीच उत्पन्न विवाद पर शुक्रवार को सीओ कार्यालय में बैठक हुई, जो बेनतीजा रही।
बैठक में फोरेस्टर राणा रंजीत चौधरी, वनरक्षी राजेश टुडू सहित वन विभाग के अधिकारी तथा ग्राम प्रधान बेरोनिका मरांडी के नेतृत्व में ग्रामीण उपस्थित थे।
सीओ कुमार देवेश द्विवेदी ने सबसे पहले ग्रामीणों का पक्ष सुना। ग्रामीणों ने बताया कि वनभूमि पर वर्षों से वे फल, सूखी लकड़ी, महुआ, दतवन, चारा इत्यादि के लिए निर्भर रहे हैं। लेकिन वन विभाग द्वारा प्रस्तावित चाहरदीवारी बनने से वनभूमि से गुजरने और वनोपज के उपयोग का उनका अधिकार पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
इस पर फोरेस्टर राणा रंजीत चौधरी ने स्पष्ट किया कि ग्रामीणों के वन अधिकार और वन पट्टा से मिले सभी अधिकार सुरक्षित रहेंगे। पार्क निर्माण पूरा होने के बाद भी ग्रामीणों से किसी भी प्रकार का प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाएगा और पार्क को सामुदायिक वन पट्टा में शामिल किया जाएगा।
दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद सीओ द्विवेदी ने कहा कि चाहरदीवारी निर्माण केवल वनभूमि की सुरक्षा के लिए किया जा रहा है और ग्रामीणों को उनके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाएगा।
हालांकि समझाने के प्रयासों के बावजूद बैठक निष्कर्षहीन रही। मौके पर सीआई साहेबराम मुर्मू, ग्राम प्रधान बेरोनिका टुडू, एमानुएल टुडू व अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।