रेलवे पेंशनभोगियों को बड़ी राहत,साहिबगंज समेत चार स्थानों पर डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र शिविर
डीएलसी अभियान-5.0 के तहत 30 नवंबर तक चलेगी सुविधा, शुरुआती दो दिनों में 88 पेंशनभोगियों के बने डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र, स्वास्थ्य जांच की भी व्यवस्था

रिपोर्ट : सोनू कुमार, साहिबगंज।
साहिबगंज:-रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को अब जीवन प्रमाणपत्र के लिए भाग-दौड़ नहीं करनी पड़ेगी. डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र (डीएलसी) अभियान-5.0 के तहत पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने राहत की बड़ी पहल की है. एक से 30 नवंबर तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत साहिबगंज समेत चार प्रमुख स्थानों पर शिविर लगाये गये हैं. खास बात यह है कि इस बार जीवन प्रमाणपत्र बनाने के साथ पेंशनभोगियों के स्वास्थ्य जांच की भी व्यवस्था की गयी है. मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में चल रहे इस अभियान से बुजुर्ग रेलकर्मियों को बड़ी सहूलियत मिल रही है.
साहिबगंज, भागलपुर और जमालपुर समेत चार स्थानों पर शिविर
पेंशनभोगियों को घर के नजदीक सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मालदा मंडल ने चार स्थानों पर विशेष शिविर आयोजित किये हैं. इनमें मंडल मुख्यालय स्थित डीआरएम कार्यालय के मंदार कॉन्फ्रेंस हॉल के अलावा भागलपुर, साहिबगंज और जमालपुर रेलवे स्टेशन शामिल हैं. शिविरों में पेंशन संबंधी सेवाओं को आसान बनाने के साथ सेवानिवृत्त रेलकर्मियों के स्वास्थ्य और कल्याण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

दो दिनों में 88 प्रमाणपत्र तैयार,अभियान को मिल रहा बेहतर रिस्पांस
अभियान शुरू होते ही पेंशनभोगियों की भागीदारी उत्साहजनक रही है. शुरुआती दो दिनों में ही करीब 88 पेंशनभोगियों के डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र सफलतापूर्वक तैयार किये जा चुके हैं. शिविरों के संचालन और बुजुर्गों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के लिए कार्मिक, लेखा और चिकित्सा विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाया गया है. आधार सहायता की सुविधा भी उपलब्ध करायी जा रही है, ताकि प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न हो.
डिजिटल व्यवस्था से खत्म होगी अनावश्यक भाग-दौड़
डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र यानी जीवन प्रमाण (Jeevan Pramaan) प्रणाली पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है. इस तकनीक आधारित व्यवस्था से जीवन प्रमाणपत्र जमा करने के लिए पेंशन संवितरण प्राधिकारियों के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की अनिवार्यता से राहत मिलती है. इससे समय की बचत के साथ प्रक्रिया अधिक सुगम और पारदर्शी बनती है.
विशेष रूप से बुजुर्ग और वरिष्ठ पेंशनभोगियों के लिए यह पहल काफी महत्वपूर्ण है. रेलवे के कार्मिक, लेखा, चिकित्सा और आधार सहायता विभागों की संयुक्त भागीदारी से चल रहा यह अभियान सेवानिवृत्त रेलकर्मियों के सम्मान, सुविधा और कल्याण के प्रति मालदा मंडल की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है.
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