डायन प्रथा सामाजिक कलंक, अंधविश्वास के खिलाफ आगे आएं छात्राएं: डॉ. चंदन
लातेहार के मुख्यमंत्री उत्कृष्ट कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में जागरूकता संगोष्ठी, छात्राओं को दिलाई गई डायन प्रथा के विरुद्ध शपथ

Reported BY Rajesh Kumar,
लातेहार, 29 अक्टूबर। डायन प्रथा के नाम पर महिलाओं के साथ होने वाला उत्पीड़न समाज के लिए गंभीर चुनौती है। इसे समाप्त करने के लिए जागरूकता, शिक्षा और कानून का प्रभावी पालन जरूरी है। इसी उद्देश्य से गुरुवार को लातेहार सदर प्रखंड स्थित मुख्यमंत्री उत्कृष्ट कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में “डायन के नाम पर महिला उत्पीड़न—एक सामाजिक कलंक” विषय पर जागरूकता संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में छात्राओं को अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाने और पीड़ित महिलाओं की मदद करने के लिए प्रेरित किया गया।

अंधविश्वास के खिलाफ वैज्ञानिक सोच अपनाने की अपील
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जिला जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. चंदन ने कहा कि डायन प्रथा मानवता पर कलंक है और यह एक गंभीर सामाजिक अपराध है। उन्होंने कहा कि किसी महिला को डायन बताकर किसी बीमारी, दुर्घटना या अनहोनी के लिए जिम्मेदार ठहराना अंधविश्वास है। ऐसी घटनाओं के पीछे वैज्ञानिक और वास्तविक कारणों को समझने की जरूरत है।
उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे इस तरह की रूढ़िवादी सोच को अपने जीवन में जगह न दें और समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही डायन प्रथा जैसी कुप्रथाओं को समाप्त किया जा सकता है।
महिला को प्रताड़ित करना दंडनीय अपराध
डॉ. चंदन ने बताया कि राज्य में डायन प्रथा के खिलाफ कानून बनाया गया है। किसी महिला को डायन बताकर प्रताड़ित करना, उसके साथ मारपीट करना या उसे अपमानित करना दंडनीय अपराध है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे समाज की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और अपने गांवों में बदलाव की वाहक बन सकती हैं। यदि कहीं किसी महिला को डायन के नाम पर प्रताड़ित किया जाता है, तो इसकी सूचना तत्काल पंचायत के मुखिया, पुलिस या जिला प्रशासन को देनी चाहिए। ऐसी घटनाओं पर चुप रहने के बजाय पीड़ित महिला की मदद के लिए आगे आना जरूरी है।
छात्राओं ने लिया अंधविश्वास मुक्त समाज का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की सभी छात्राओं को डायन प्रथा के विरुद्ध शपथ दिलाई गई। छात्राओं से एक ऐसे समाज के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया गया, जहां महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकार मिलें तथा अंधविश्वास के आधार पर किसी के साथ भेदभाव या उत्पीड़न न हो।
मौके पर विद्यालय की वार्डेन पिंकी कुमारी, सहयोगी शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा जिला जनसंपर्क विभाग के सूर्यतनय सिंह, राकेश कुमार मिश्रा, दीपक कुमार, मुर्शीद अंसारी, संतोष कुमार सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
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