पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था की मांग को लेकर पाकुड़ में बैंककर्मियों की हड़ताल
SBI से बैंक ऑफ इंडिया तक कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता, 28 से तीन दिवसीय बैंक बंदी की घोषणा

पाकुड़ संवाददाता। पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने समेत विभिन्न लंबित मांगों को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर शुक्रवार को बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने एकदिवसीय हड़ताल की। इसका असर पाकुड़ जिले में भी देखने को मिला। विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों ने हड़ताल में सक्रिय भागीदारी करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और एकजुटता प्रदर्शित की।
आंदोलन का प्रमुख मुद्दा पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करना और बैंक कर्मचारियों की लंबित मांगों का शीघ्र समाधान रहा। हड़ताल को सफल बनाने के लिए बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों ने विभिन्न शाखाओं के कर्मचारियों से संपर्क कर उन्हें आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता
हड़ताल के दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और केनरा बैंक समेत विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों एवं अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी रही। केनरा बैंक से असद कमरान और सुबोध कुमार तथा बैंक ऑफ इंडिया से सौमित्र सरकार, सौविक, शांति मुर्मू, देबलिना गोस्वामी, अनुरंजन आनंद, सुरेश राय और फ्रांसिस हेम्ब्रम समेत अन्य बैंककर्मी आंदोलन में शामिल रहे।

इसके अलावा विकास हांसदा, अवनीकांत, सत्यजीत, मीनू मुर्मू, शशांक झा, अमित, सूरज, शुभम और गुलाम अम्बिया समेत विभिन्न बैंकों के दर्जनों कर्मचारी एवं अधिकारी भी हड़ताल में शामिल हुए।
दो साल से अधिक समय से लंबित है मांग
यूएफबीयू के अनुसार, पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग लंबे समय से लंबित है। यूनियन का कहना है कि इस मुद्दे पर कई बार समझौते और बातचीत हो चुकी है, लेकिन अंतिम सरकारी मंजूरी नहीं मिल सकी है।
यूनियन के अनुसार, 23 मई 2015 के समझौते एवं संयुक्त पत्र में सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने की दिशा में सहमति बनी थी। इसके बाद 11 नवंबर 2020 के समझौते में भी इस विषय पर चर्चा हुई। 7 दिसंबर 2023 के समझौता ज्ञापन में सभी शनिवारों को बैंकिंग उद्योग के लिए अवकाश घोषित करने की सिफारिश की गई। वहीं, 8 मार्च 2024 के 12वें द्विपक्षीय समझौते एवं संयुक्त पत्र में आवश्यक सरकारी मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू करने की बात कही गई थी।
यूनियन नेताओं का आरोप है कि इसके बावजूद अंतिम सरकारी मंजूरी में लगातार देरी हो रही है।
आश्वासन के बावजूद नहीं निकला समाधान
बैंक यूनियनों के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर सरकार के स्तर पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। मार्च 2025 में प्रस्तावित हड़ताल के दौरान भी उच्च स्तर पर मामले पर विचार किए जाने का आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन स्थगित किया गया था। हालांकि, अपेक्षित निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों और अधिकारियों में असंतोष बढ़ता गया।
यूएफबीयू ने 27 जनवरी 2026 को भी पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था समेत विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बावजूद ठोस निर्णय नहीं होने पर 11 सितंबर 2026 को राष्ट्रव्यापी एकदिवसीय हड़ताल का आह्वान किया गया।
28 से तीन दिवसीय बैंक बंदी
बैंक कर्मचारियों के आंदोलन का अगला चरण और व्यापक होने की घोषणा की गई है। यूएफबीयू के कार्यक्रम के अनुसार 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक बंदी की जाएगी। इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं होने पर 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है।
यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था समेत अन्य लंबित मांगों के समाधान तक आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
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