रिपोर्टिंग: प्रेम कुमार साहू,
घाघरा प्रखंड के हापामुनी गांव में आयोजित पाँच दिवसीय प्रसिद्ध मंडा मेला का समापन आज पारंपरिक भोक्ता झूलन के साथ श्रद्धा और उमंग के माहौल में संपन्न हुआ। वर्षों पुरानी इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए दूर-दूर से आए हजारों श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
मेले के अंतिम दिन भोक्ताओं द्वारा विशेष पूजा-अनुष्ठान किया गया। पारंपरिक परिधान में सजे भोक्ता बांस से तैयार ऊँची ठठरी (मचान) पर चढ़कर कमर में रस्सी बांधकर झूलते हैं। झूलते समय वे श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा करते हैं, जिसे लोग अत्यंत श्रद्धा के साथ प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। इस दृश्य को देखने के लिए आसपास के गांवों के साथ ही कई जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
पूरे आयोजन के दौरान भक्तिमय और सांस्कृतिक वातावरण बना रहा। मेले में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, पारंपरिक कार्यक्रम और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने क्षेत्र की आस्था, परंपरा और लोक-संस्कृति को जीवंत कर दिया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि मंडा मेला आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है, जो समुदाय को जोड़ने का कार्य करता है। आयोजन समिति ने मेले के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी ग्रामीणों, स्वयंसेवकों और प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
पारंपरिक भोक्ता झूलन के साथ पाँच दिवसीय मंडा मेला हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ, जो श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार धार्मिक अनुभव बन गया।
कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख लोग—
प्रो. अवध मनी पाठक (संरक्षक सह अध्यक्ष), कृष्ण जीवन पाठक, भारत भूषण पाठक, सुधाकर मनी पाठक, गौरव पाठक, राजेश मणि पाठक, शैलेश मनी पाठक, निलेश मनी पाठक, अजीत मनी पाठक, मुकेश मनी पाठक, मिथिलेश मनी पाठक, शाश्वत पाठक, पीयूष पाठक, त्रिभुवन मनी पाठक, पुरुषोत्तम मनी पाठक, प्रदीप मनी पाठक, भूवन मनी पाठक, मिंटू पाठक, अनिरुद्ध चौबे, आदित्य भगत, मुखिया विनीता उरांव, प्रधान उरांव, कनक भगत, दिलीप महली, रविंद्र महली, मनीष महली, बिंदेश्वर साहू, सुरेंद्र साहू सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे।