पंकज कुमार यादव,
सरयू प्रखंड के चोरहा गांव में सरकार की योजनाओं की जमीन पर हकीकत कुछ और ही कहती है। पंचायत में दो आंगनवाड़ी केंद्र हैं, जिनमें से एक नियमित रूप से संचालित हो रहा है, लेकिन दूसरा पिछले तीन वर्षों से अधूरा पड़ा है। अधूरा भवन धीरे-धीरे निजी आवास में बदलता जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, चोरहा गांव के महेश उरांव और उनकी पत्नी इस अधूरे आंगनवाड़ी भवन में रह रहे हैं। वहीं दूसरा केंद्र किसी निजी घर में अस्थायी रूप से संचालित किया जा रहा है।
इस अस्थायी व्यवस्था में बच्चों के बैठने और खेलने की उचित सुविधा नहीं है, जिससे उनके पोषण और प्रारंभिक शिक्षा पर असर पड़ रहा है।स्थानीय लोगों ने बताया कि अधूरे भवन का निर्माण कार्य तीन साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन ठेकेदार और संबंधित विभाग की लापरवाही के कारण इसे अब तक पूरा नहीं किया गया। समय-समय पर अधिकारियों को जानकारी देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि अधूरे आंगनवाड़ी भवन का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए और इसे सरकारी उपयोग में लाकर बच्चों के लिए सुरक्षित और उपयुक्त वातावरण सुनिश्चित किया जाए। वर्तमान में चोरहा आंगनवाड़ी केंद्र 2 में बच्चों को सेविका देवती देवी के घर में पोषण और पढ़ाई की व्यवस्था दी जा रही है।