जमशेदपुर में RSS का भव्य शाखा संगम, 213 शाखाओं के स्वयंसेवक हुए शामिल
213 शाखाओं के स्वयंसेवक जुटे गोपाल मैदान, सामूहिक प्रार्थना नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि... से गूंजा गोपाल मैदान

दीपक कुमार की खास रिपोर्ट,
जमशेदपुर:- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ( R.S.S ) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को जमशेदपुर महानगर द्वारा बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में भव्य शाखा संगम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जमशेदपुर महानगर की 213 शाखाओं के स्वयंसेवक शाम 4 बजे बिष्टुपुर के गोपाल मैदान में एकत्रित हुए। इतने बड़े स्तर पर आयोजित इस शाखा संगम में स्वयंसेवकों की सामूहिक सहभागिता, अनुशासन एवं संगठनात्मक एकात्मता ने सबों का ध्यान खींचा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एन.आई.टी. जमशेदपुर के निदेशक डॉ. गौतम सूत्रधर जी उपस्थित थे। वहीं मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर – पूर्व क्षेत्र ( बिहार-झारखंड ) के बौद्धिक प्रमुख राणा प्रताप जी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
बतौर मुख्य अतिथि डॉ. गौतम सूत्रधर जी ने अपने संबोधन में राष्ट्र निर्माण एवं सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के योगदान को रेखांकित किया।
उन्होंने संघ द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों, सेवा, संगठन, सामाजिक जागरूकता तथा राष्ट्रभाव के प्रसार में स्वयंसेवकों की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि “शाखा संघ का प्राण है।” और यह व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है। शाखा के माध्यम से व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सकारात्मक सोच एवं सामाजिक दायित्वबोध जैसे अनेक गुणों का विकास होता है। नियमित शाखा से व्यक्ति के जीवन में बड़े-बड़े सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और यही परिवर्तन आगे चलकर समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मुख्य वक्ता राणा प्रताप जी ने अपने बौद्धिक उद्बोधन में बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की आवश्यकता क्यों पड़ी और उस समय देश एवं समाज के समक्ष किस प्रकार की चुनौतियाँ थीं। उन्होंने कहा कि संगठित, अनुशासित एवं राष्ट्रभाव से युक्त समाज के निर्माण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए संघ की स्थापना हुई। संघ का मूल उद्देश्य व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज का संगठन और राष्ट्र जीवन को सशक्त बनाना है।
उन्होंने शाखा तंत्र की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शाखा केवल शारीरिक गतिविधियों अथवा नियमित मिलन का केंद्र नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति निर्माण की प्रयोगशाला है। शाखा के माध्यम से स्वयंसेवकों में अनुशासन, समयबद्धता, नेतृत्व क्षमता, सामूहिकता, आत्मविश्वास, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति समर्पण जैसे गुणों का विकास होता है।
नियमित शाखा के माध्यम से व्यक्ति का निर्माण होता है और व्यक्ति निर्माण से संगठित एवं सशक्त समाज का निर्माण संभव होता है।
उन्होंने आगे कहा कि संघ का कार्य केवल संगठन के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना और प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने दायित्वों के प्रति जागरूक करना भी है।
उन्होंने संघ द्वारा प्रस्तावित पंच परिवर्तन की अवधारणा को विशेष रूप से रेखांकित किया। इसके अंतर्गत सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी का आचरण तथा नागरिक कर्तव्य जैसे पाँच प्रमुख विषयों को समाज परिवर्तन का आधार बताया। उन्होंने इन विषयों को केवल विचार तक सीमित न रखते हुए प्रत्येक स्वयंसेवक एवं नागरिक के दैनिक जीवन में व्यवहार के रूप में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित यह शाखा संगम जमशेदपुर महानगर की 213 शाखाओं के स्वयंसेवकों के सामूहिक एकत्रीकरण का महत्वपूर्ण अवसर बना। इस आयोजन ने शाखा कार्य की व्यापकता, संगठनात्मक एकात्मता तथा समाज के प्रति स्वयंसेवकों की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।
कार्यक्रम का समापन संघ की प्रार्थना नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि… के साथ हुई। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने संघ के आदर्शों, राष्ट्रभाव एवं समाज के प्रति समर्पण के संकल्प को दोहराया।
शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इस शाखा संगम में जमशेदपुर महानगर की 213 शाखाओं के स्वयंसेवकों की सहभागिता ने संगठनात्मक एकजुटता और सामूहिकता का परिचय दिया। कार्यक्रम का समापन संघ की प्रार्थना ‘नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमि…’ के सामूहिक गायन के साथ हुआ। इस दौरान पूरा गोपाल मैदान प्रार्थना के स्वर से गूंज उठा।
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