छात्रावास में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, आदिवासी विद्यार्थियों ने कॉलेज के मुख्य द्वार पर जड़ा ताला
शिबू सोरेन जनजातीय इंटर महाविद्यालय के छात्र अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे; पानी, बिजली, शौचालय, भवन मरम्मत और पुस्तकालय की कर रहे मांग

बोरियो। शिक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर शिबू सोरेन जनजातीय इंटर महाविद्यालय के छात्रावास में रह रहे आदिवासी विद्यार्थियों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों का आरोप है कि छात्रावास में न पीने के पानी की व्यवस्था है, न बिजली और न ही शौचालय की सुविधा। जर्जर भवन में रहने को मजबूर विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान नहीं होने पर शनिवार को उनका आक्रोश फूट पड़ा। छात्र नेता सुनील बास्की के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया और अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
इस दौरान छात्रों ने कॉलेज और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाएं चाहिए।

एक किलोमीटर दूर से पानी लाने की मजबूरी
छात्र नेता सुनील बास्की ने बताया कि छात्रावास में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। विद्यार्थियों को रोजाना करीब एक किलोमीटर दूर स्थित चापानल से पानी लाना पड़ता है। पानी जुटाने में ही उनका काफी समय निकल जाता है, जिससे पढ़ाई भी प्रभावित होती है। छात्रों का कहना है कि शिक्षा हासिल करने के लिए छात्रावास में रहने के बावजूद उन्हें अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
मोमबत्ती और मोबाइल टॉर्च की रोशनी में पढ़ाई
छात्रों के अनुसार, छात्रावास में बिजली कनेक्शन नहीं होने के कारण वे कई महीनों से अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। रात में मोमबत्ती और मोबाइल की टॉर्च के सहारे पढ़ाई करनी पड़ती है। विद्यार्थियों का कहना है कि पर्याप्त रोशनी और बिजली जैसी जरूरी सुविधा के अभाव में उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जर्जर भवन और शौचालय की सुविधा भी नहीं
विद्यार्थियों ने बताया कि छात्रावास का भवन काफी जर्जर हो चुका है। दीवारों में जगह-जगह बड़ी दरारें हैं और बारिश के दौरान छत से पानी टपकता है। ऐसे में भवन की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रावास में एक भी शौचालय नहीं है। इसके अलावा महाविद्यालय में पुस्तकालय की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। छात्रों के मुताबिक, रहने, स्वच्छता और पढ़ाई से जुड़ी इन समस्याओं के कारण उन्हें लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
छात्र नेता सुनील बास्की ने कहा कि गरीब आदिवासी परिवारों के बच्चे बेहतर शिक्षा और भविष्य की उम्मीद लेकर यहां आते हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय का नाम दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नाम पर रखा गया है, लेकिन छात्रावास की स्थिति चिंताजनक है। ऐसे माहौल में विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो रहा है।
प्राचार्य बोले- अधिकारियों को फिर भेजेंगे पत्र
महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य आदिल राशिद ने छात्रों की मांगों को जायज बताया। उन्होंने कहा कि छात्रावास की बदहाल स्थिति और सुविधाओं के अभाव को लेकर पहले भी जिला प्रशासन के वरीय अधिकारियों को कई बार लिखित पत्र भेजे जा चुके हैं। अब आंदोलन को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को दोबारा पत्र भेजकर समस्याओं के शीघ्र समाधान का अनुरोध किया जाएगा।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
प्राचार्य की ओर से समस्याओं के समाधान का भरोसा दिए जाने के बावजूद छात्र आंदोलन समाप्त करने को तैयार नहीं हैं। विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया कि जब तक पेयजल, बिजली, शौचालय, जर्जर भवन की मरम्मत और पुस्तकालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। छात्रों ने मुख्य द्वार का ताला खोलने से भी इनकार कर दिया है।
आंदोलन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक संजय दादा, सिमोन मुर्मू, मनोज हांसदा, मुंसी हांसदा, लखीराम मुर्मू, संजय हांसदा, पटवारी मरांडी, परमेश्वर मुर्मू और सूरज हेम्ब्रम सहित बड़ी संख्या में छात्र शामिल रहे।
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