तमाड़ में माता-पिता को खो चुके दो मासूमों का प्रशासन बना सहारा, स्कूल में कराया दाखिला**
Ranchi news

चार दिन में उजड़ गया परिवार, प्रशासन ने थामा दो मासूमों का हाथ
रांची। तमाड़ प्रखंड के लेंकेया गांव में माता-पिता की मौत के बाद बेसहारा हुए दो मासूम बच्चों के लिए बुंडू अनुमंडल प्रशासन मददगार बनकर सामने आया है। महज चार दिन के अंतराल में मां और पिता दोनों को खो चुके आठ वर्षीय बेटे और तीन वर्षीय बेटी की स्थिति की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने उनके संरक्षण, शिक्षा और रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की पहल की।

जानकारी के अनुसार, लेंकेया गांव निवासी योगेंद्र मुंडा की पत्नी सावित्री देवी का बीमारी के कारण निधन हो गया था। पत्नी की मौत के कुछ ही दिनों बाद, 18 सितंबर को योगेंद्र मुंडा की भी मौत हो गई। माता-पिता के निधन से दोनों बच्चे पूरी तरह बेसहारा हो गए। परिवार में ऐसा कोई करीबी सदस्य नहीं था, जो लंबे समय तक उनकी जिम्मेदारी उठा सके।
ऐसे कठिन समय में रिश्ते में दूर के चाचा ने दोनों बच्चों को अपने पास रख लिया। उन्होंने करीब एक महीने तक बच्चों की देखभाल की और अपनी क्षमता के अनुसार उनकी जरूरतें पूरी कीं। इसी दौरान मामले की जानकारी बुंडू अनुमंडल प्रशासन को मिली।
एसडीएम के नेतृत्व में गांव पहुंची टीम
बुधवार को बुंडू अनुमंडल पदाधिकारी मोहन लाल मरांडी के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम लेंकेया गांव पहुंची। टीम में तमाड़ के बीडीओ अनिल कुमार मिंज, कल्याण पदाधिकारी अरविंद कुमार तथा डालसा की पैरा लीगल वॉलंटियर अनिमा मल्लिक, सोनामनी देवी और रुकमणी देवी शामिल थीं।
टीम ने कुंदला पंचायत की मुखिया शकुंतला देवी और ग्रामीणों से बातचीत कर बच्चों की स्थिति की जानकारी ली। प्रशासनिक अधिकारियों ने बच्चों की देखभाल, पारिवारिक स्थिति और उनके भविष्य से जुड़े पहलुओं पर भी जानकारी जुटाई।
तत्काल राहत के साथ भविष्य की भी चिंता
प्रशासन की ओर से दोनों बच्चों को कपड़े और कंबल उपलब्ध कराए गए। उनके लिए राशन सामग्री की भी व्यवस्था की गई। बच्चों को अपने पास रखकर देखभाल कर रहे दूर के रिश्तेदार को भी राशन उपलब्ध कराया गया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बच्चों को केवल तत्काल सहायता देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की व्यवस्था भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से दोनों बच्चों का तमाड़ स्थित आनंद मार्ग स्कूल में दाखिला कराया गया। स्कूल में हॉस्टल की सुविधा होने के कारण अब दोनों बच्चे वहीं रहकर पढ़ाई कर सकेंगे।
स्कूल प्रबंधन ने ली बच्चों की जिम्मेदारी
आनंद मार्ग स्कूल के प्रिंसिपल सुमित सेठ ने बच्चों की देखभाल को लेकर भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि दोनों बच्चों को स्कूल में अपने बच्चों की तरह रखा जाएगा। उनकी पढ़ाई के साथ-साथ रहने और आवश्यक देखभाल का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
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