
रिपोर्ट: प्रेम कुमार साहू, घाघरा (गुमला)
घाघरा में हिंडाल्को कंपनी के खिलाफ चल रहा आंदोलन शुक्रवार को 13वें दिन और अधिक उग्र हो गया। आंदोलनकारियों ने बॉक्साइट ट्रकों का परिचालन पूरी तरह ठप कर दिया, जिसके कारण सड़क पर ट्रकों की लंबी कतारें लग गईं और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो गई।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक बॉक्साइट ट्रकों का परिचालन किसी भी स्थिति में शुरू नहीं होने दिया जाएगा। मौके पर स्थिति तनावपूर्ण होती देख सूचना मिलने पर थाना प्रभारी मोहन कुमार सिंह दल-बल के साथ पहुंचे और आंदोलनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी।
आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि यदि हिंडाल्को अपनी मनमानी कर सकती है, तो वे भी अपने हक और अधिकार की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे। इस दौरान मौके पर जमकर नारेबाजी हुई—
“हिंडाल्को की मनमानी नहीं चलेगी”,
“अधिकारियों की तानाशाही नहीं चलेगी”,
“डीएमएफटी का पैसा हमारा है”,
“सीएसआर का पैसा हमारा है, उस पर हमारा अधिकार पहले है” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
“हमारे अधिकार के पैसे का बंदरबांट किया जा रहा है” – सूरज नायक

आंदोलनकारी सूरज नायक ने आरोप लगाया कि डीएमएफटी (DMFT) फंड आम जनता का अधिकार है, जिसका उपयोग क्षेत्र के विकास कार्यों में होना चाहिए, लेकिन इसका बड़े स्तर पर बंदरबांट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब से क्षेत्र में हिंडाल्को द्वारा खनन कार्य किया जा रहा है, तब से स्थानीय ग्रामीणों का लगातार शोषण हो रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रभावित क्षेत्र के लोगों को डीएमएफटी फंड का प्राथमिक लाभ मिलना चाहिए, लेकिन आज भी गांवों में मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है। न तो बिजली की उचित व्यवस्था है, न पीने का साफ पानी और न ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा।
ग्रामीणों ने बताया कि स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण गंभीर स्थिति में मरीजों को प्रखंड मुख्यालय ले जाने के दौरान कई बार रास्ते में ही प्रसव जैसी घटनाएं हो जाती हैं या जान तक चली जाती है।
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