पचवाड़ा नॉर्थ कोल माइंस क्षेत्र में मोबाइल मेडिकल यूनिट की शुरुआत, अब गांव-गांव पहुंचेगी स्वास्थ्य सेवा
Pakud News

पाकुड़ | विशेष संवाददाता
वर्षों से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर पचवाड़ा नॉर्थ कोल माइंस क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए इस बार विश्वकर्मा पूजा नई उम्मीद लेकर आई है। अब इलाज के लिए बार-बार अस्पताल जाने की परेशानी काफी हद तक कम होगी, क्योंकि चिकित्सा सुविधा खुद गांव की चौखट तक पहुंचने लगी है। परियोजना प्रभावित गांवों में प्राथमिक और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यहां मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) की शुरुआत की गई है।

प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रमोद कुमार गुप्ता और अंचल अधिकारी औसाफ अहमद खान ने संयुक्त रूप से इस मोबाइल चिकित्सा सेवा का उद्घाटन किया। यह सुविधा डब्ल्यूपीबीडीसीएल की ओर से उपलब्ध कराई गई है, जिससे लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं की कमी झेल रहे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
नौ गांवों को मिलेगा लाभ, सप्ताह में दो दिन पहुंचेगी टीम
मोबाइल मेडिकल यूनिट के जरिए परियोजना प्रभावित कुल नौ गांवों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा गया है। तय कार्यक्रम के अनुसार हर गांव में सप्ताह में दो दिन चिकित्सकीय टीम पहुंचेगी। ग्रामीणों को डॉक्टर से परामर्श, स्वास्थ्य जांच, जरूरी परीक्षण और दवाइयां पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे सामान्य बीमारियों और प्राथमिक जांच के लिए अब उन्हें दूर अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
एक ही वाहन में जांच से उपचार तक की सुविधा
यह मोबाइल यूनिट केवल एक वाहन नहीं, बल्कि चलते-फिरते अस्पताल की तरह है। इसमें एक एमबीबीएस चिकित्सक और दो नर्सों की टीम तैनात रहेगी। वाहन में मोबाइल पैथोलॉजी, ईसीजी, फीटल डॉप्लर, ओटोस्कोप, ऑक्सीजन सिलेंडर और मलेरिया, डेंगू व टाइफाइड जांच किट जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही जरूरत के अनुसार दवाइयां भी मौके पर ही दी जाएंगी। यानी परामर्श, जांच और प्राथमिक उपचार—तीनों सुविधाएं एक ही जगह पर मिलेंगी।
उद्घाटन पर दिखा उत्साह, ग्रामीणों को बड़ी राहत
मोबाइल मेडिकल यूनिट के शुभारंभ के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। लोगों में इस बात को लेकर उत्साह साफ दिखा कि अब छोटी-मोटी बीमारियों के लिए उन्हें दूर-दराज के अस्पतालों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इस दौरान बीडीओ प्रमोद कुमार गुप्ता ने स्वयं अपना रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट कराकर लोगों को जागरूक भी किया।
कार्यक्रम में डब्ल्यूपीबीडीसीएल के महाप्रबंधक रामाशीष चटर्जी, माइंस मैनेजर महेश कुमार, वेलफेयर ऑफिसर देबाशीष भुइं, एसएचएआर प्रोजेक्ट्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिलीप तमन और सीएसआर एवं जनसंपर्क के महाप्रबंधक संजय बेसरा समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे।
बिशनपुर स्वास्थ्य केंद्र से आगे बढ़ा दायरा
पचवाड़ा नॉर्थ कोल माइंस की आरएंडआर कॉलोनी, बिशनपुर में पहले से स्वास्थ्य केंद्र संचालित है, जहां रोजाना डॉक्टर और नर्स उपलब्ध रहते हैं। अब मोबाइल मेडिकल यूनिट के शुरू होने से स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा और बढ़ गया है, जो दूरस्थ गांवों तक पहुंचेगा।
दूर-दराज इलाकों के लिए बड़ी पहल
ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी बीमारियां समय पर इलाज नहीं मिलने से गंभीर रूप ले लेती हैं। ऐसे में गांव-गांव पहुंचने वाली यह मोबाइल चिकित्सा सेवा प्रारंभिक जांच और उपचार में अहम भूमिका निभाएगी। यह पहल “मरीज को अस्पताल तक लाने” के बजाय “अस्पताल को मरीज तक पहुंचाने” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
हालांकि अब नजर इस बात पर रहेगी कि मोबाइल मेडिकल यूनिट तय समय के अनुसार नियमित रूप से सभी गांवों तक पहुंचती है या नहीं। क्योंकि किसी भी योजना की असली सफलता उसके उद्घाटन में नहीं, बल्कि उस गांव में तय होती है जहां जरूरतमंद व्यक्ति समय पर इलाज की उम्मीद करता है।
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