एमआरएमए 2.0 के तहत अमृतपुर में रेशम उत्पादन पर जागरूकता कार्यक्रम, किसानों को वैज्ञानिक तकनीक अपनाने की सलाह
रेशम उत्पादन की संभावनाओं पर चर्चा

पाकुड़ संवाददाता/महेशपुर। प्रखंड के अमृतपुर गांव में शुक्रवार को एमआरएमए 2.0 अभियान के तहत रेशम उत्पादन को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक बी. गौथमी और सहायक निदेशक, दुमका के दास कुमार एक्का मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
रेशम उत्पादन की संभावनाओं पर चर्चा
कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्रीय स्तर पर रेशम उत्पादन से जुड़ी समस्याओं को समझना और उनके व्यावहारिक समाधान तलाशना था। इस दौरान किसानों को रेशम उत्पादन की संभावनाओं, सरकारी योजनाओं और उपलब्ध सहायता की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ के लिए आधुनिक तकनीक व वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाने पर जोर दिया गया।

रोजगार और स्वरोजगार के अवसर
अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने बताया कि रेशम उत्पादन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार का मजबूत माध्यम बन सकता है। खासकर युवाओं के लिए यह एक स्थायी आय का अच्छा विकल्प है। कार्यक्रम में इस क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
ड्रोन छिड़काव पर बरतें सावधानी
कार्यक्रम में ड्रोन के माध्यम से कीटनाशक छिड़काव के दौरान होने वाले बहाव और उसके शहतूत की खेती तथा रेशमकीट पालन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर किसानों को जागरूक किया गया। किसानों को आपसी समन्वय बनाकर छिड़काव करने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी गई।
किसानों ने रखी अपनी समस्याएं
इस दौरान किसानों ने जल की कमी, श्रमिकों की कमी, नॉन-स्पिनिंग सिंड्रोम और गुणवत्तापूर्ण डीएफएल (Disease Free Layings) की उपलब्धता जैसी समस्याएं सामने रखीं। वैज्ञानिकों ने इन समस्याओं के समाधान के लिए तकनीकी सुझाव दिए और प्रभावित किसानों को पुनः रेशम उत्पादन शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया।
क्लस्टर आधारित मॉडल पर जोर
किसानों को क्लस्टर आधारित खेती अपनाने की सलाह दी गई, जिससे आसपास के किसान मिलकर शहतूत की खेती, कीटनाशक प्रबंधन और रेशमकीट पालन कर सकें। इससे उत्पादन में सुधार और लागत में कमी संभव है।
रोग प्रबंधन और स्वच्छता पर मार्गदर्शन
कार्यक्रम में रोग प्रबंधन, स्वच्छता और टिकाऊ रेशम उत्पादन के तरीकों पर भी जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि समन्वय, स्वच्छता और आधुनिक तकनीक के उपयोग से क्षेत्र में रेशम उत्पादन को मजबूत किया जा सकता है।
मौके पर एसटीए एनडी. भुईमाली, परमेश्वर यादव सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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