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भूमि बंदोबस्ती मामले में सुबोध प्रसाद का पलटवार, बोले— दादा के नाम हुई थी बंदोबस्ती,आरोप निराधार

प्रेस कॉन्फ्रेंस कर परिवार की छवि खराब करने का लगाया आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

लातेहार। लातेहार सदर प्रखंड के करकट गांव निवासी सुबोध प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने पिता रामवृक्ष प्रसाद पर लगाए गए भूमि बंदोबस्ती संबंधी आरोपों को पूरी तरह निराधार, भ्रामक और तथ्यों से परे बताया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग निजी रंजिश और स्वार्थवश उनके परिवार की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।

भूमि बंदोबस्ती मामले में सुबोध प्रसाद का पलटवार, बोले— दादा के नाम हुई थी बंदोबस्ती,आरोप निराधार

गौरतलब है कि हाल ही में जिला परिषद अध्यक्ष बिनोद उरांव ने अपर समाहर्ता को आवेदन देकर कथित रूप से गलत तरीके से भूमि बंदोबस्ती किए जाने के मामले की जांच कराने की मांग की थी। इसी संदर्भ में सुबोध प्रसाद ने अपनी प्रतिक्रिया सार्वजनिक की।

उन्होंने बताया कि मीडिया में प्रकाशित खबरों में उनके पिता रामवृक्ष प्रसाद का जन्म वर्ष 1955 बताया गया है, जबकि संबंधित भूमि का बंदोबस्ती वर्ष 1949-50 में हुआ था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उक्त भूमि का बंदोबस्ती उनके पिता के नाम पर नहीं, बल्कि उनके दादा स्वर्गीय विगावन साहु (पिता स्वर्गीय चौआ साहु) के नाम पर वर्ष 1949-50 में विधिवत किया गया था।

सुबोध प्रसाद के अनुसार, दादा के निधन के लगभग 35-40 वर्ष बाद उनके पिता रामवृक्ष प्रसाद और चाचा स्वर्गीय श्रीस्ता प्रसाद ने नियमानुसार उक्त भूमि का नामांतरण अपने नाम से कराया। वर्तमान में भूमि का रिकॉर्ड दोनों के नाम दर्ज है तथा ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से नियमित रूप से लगान रसीद कट रही है।

उन्होंने कहा कि बंदोबस्ती, नामांतरण और राजस्व भुगतान से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज उनके पास उपलब्ध हैं, जिन्हें जांच के दौरान प्रस्तुत किया जा सकता है।

सुबोध प्रसाद ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की और कहा कि किसी भी व्यक्ति पर आरोप लगाने से पहले दोनों पक्षों की बात सुनना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई दोषी पाया जाता है तो कानून अपना काम करेगा, लेकिन बिना तथ्यों के किसी परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना उचित नहीं है।

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