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रानीपुर में परगला नदी तट पर मकर संक्रांति का भव्य मेला, आस्था-विश्वास और परंपरा का दिखा अद्भुत संगम

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रानीपुर में परगला नदी तट पर मकर संक्रांति का भव्य मेला, आस्था-विश्वास और परंपरा का दिखा अद्भुत संगम

संवाददाता केशव तिवारी

पाकुड़:- पाकुड़ जिले के हिरणपुर प्रखंड अंतर्गत रानीपुर गांव में परगला नदी के तट पर मकर संक्रांति के अवसर पर भव्य मेले का आयोजन किया गया। इस मेले में संथाल परगना प्रमंडल के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। आम लोगों के साथ-साथ साफाहोड़ धर्म को मानने वाले श्रद्धालुओं की उपस्थिति विशेष रूप से देखने को मिली।

मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं ने किया नदी में पवित्र स्नान

मकर संक्रांति की अहले सुबह से ही श्रद्धालुओं ने परगला नदी में पवित्र स्नान किया। स्नान के पश्चात नदी तट पर स्थित मंदिर में भगवान राम-लखन सहित अन्य देवी-देवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। साफाहोड़ धर्म के धर्मगुरुओं ने बताया कि इस पूजा का मुख्य उद्देश्य पूर्व में हुई भूल-चूक अथवा पाप से मुक्ति पाना और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करना है।

विशिष्ट परंपरा से पूजा कर मेले का आयोजन

मेले की एक प्रमुख और विशिष्ट परंपरा आग की पूजा रही। इस दौरान साफाहोड़ धर्मावलंबी जलती हुई आग को लांघते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस परंपरा से चर्म रोग, घाव, फोड़े-फुंसी जैसी बीमारियों से राहत मिलती है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी पूरी आस्था और विश्वास के साथ निभाई जाती है।दूर-दराज क्षेत्रों से आए साफाहोड़ धर्म के श्रद्धालु 13 जनवरी को ही रानीपुर पहुंच जाते हैं।

14 जनवरी की सुबह से पूजा-पाठ शुरू होकर शाम तक चलता है। मेले में खाने-पीने की चीजों, खिलौनों, मिठाइयों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की कई दुकानें लगी हुई थीं, जहां लोगों ने जमकर खरीदारी की।मेला 14 जनवरी को सुबह से शाम करीब 7 बजे तक चला।

मेले में शांति व्यवस्था को लेकर प्रशासन अलर्ट

मेले के दौरान शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी पूरे समय मौके पर तैनात रहे, जिससे मेला शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सका।कुल मिलाकर, रानीपुर का यह मकर संक्रांति मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र रहा, बल्कि सामाजिक एकता, मेल-मिलाप और पारंपरिक संस्कृति को मजबूत करने का भी सशक्त माध्यम बना।

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