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रुकी पंचायत के बड़ा अजियातु में तालाब सीढ़ी निर्माण 15वें वित्त योजना में भ्रष्टाचार का आरोप

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रुकी पंचायत के बड़ा अजियातु में तालाब सीढ़ी निर्माण 15वें वित्त योजना में भ्रष्टाचार का आरोप

घाघरा/गुमला:- गुमला जिला के घाघरा प्रखंड अंतर्गत रुकी पंचायत के बड़ा अजियातु गांव में 15वीं वित्त आयोग के मुखिया फंड से तालाब में सीढ़ी निर्माण योजना को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।

वित्त वर्ष 2023-24 में इस योजना के लिए ₹2.80 लाख की स्वीकृति हुई थी। ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम सभा के आयोजन का फर्जी दस्तावेज दिखाकर एक लाभुक समिति बनाई गई और कार्य के लिए ₹1.55 लाख का भुगतान भी कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि एक साल 9 महीने 28 दिन बीत जाने के बाद भी योजना स्थल पर सीढ़ी का कोई चिन्ह नहीं है। *ग्रामीणों का आरोप :–बिचौलियों ने सचिव के साथ मिलकर राशि हड़पी* ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य शुरू किए बिना ही बिचौलियों ने पंचायत सचिव के साथ मिलकर राशि हड़प ली।

ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि फंड की कमी नहीं है, बल्कि बिचौलियों का हस्तक्षेप और प्रशासन की लापरवाही के कारण योजनाएं धरातल पर नहीं उतर रही हैं।*ग्रामीणों की मांग – निष्पक्ष जांच और शीघ्र निर्माण*ग्रामीणों ने पंचायत और प्रशासन से मांग की है कि इस भ्रष्टाचार और अपारदर्शिता की निष्पक्ष जांच की जाए तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो। साथ ही जल्द से जल्द तालाब में सीढ़ी का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि कार्य में 21 महीने से भी अधिक की देरी से स्पष्ट है कि योजना को लेकर गंभीरता नहीं बरती गई।

प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ स्वर

रुकी पंचायत के बड़ा अजियातु में तालाब सीढ़ी निर्माण 15वें वित्त योजना में भ्रष्टाचार का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर और पारदर्शी तरीके से योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाता तो अब तक योजना पूर्ण हो जाता ।ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए वे कहते हैं कि शासन और प्रशासन को बिचौलियों की पैठ रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

बिचौलिया के जगह यदि आवास लाभुक होते तो अब तक राशि की रिकवरी हो जाती

आवास लाभुकों के द्वारा पैसा का भुगतान मिल जाने के बाद भी यदि जल्द कार्य शुरू नहीं कराया जाता है तो अधिकारी बार-बार उन्हें टॉर्चर करते हैं की जल्द से जल्द कार्य शुरू करें अन्यथा ब्याज के साथ भुगतान किया गया राशि का रिकवरी किया जाएगा । वहीं दूसरी तरफ बिचौलियों को योजना निर्माण के लिए राशि का भुगतान हो जाने के 2 साल बाद भी निरीक्षण नहीं करते हैं की योजना स्थल पर योजना है भी या नहीं । इस बात का शुद्ध लेने वाले कोई अधिकारी नहीं है । यह अधिकारियों की उदासीन रवैया को दर्शाता है ।

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